Sawan Somwar Date : हिंदू धर्म में आषाढ़ की विदाई के बाद आने वाला श्रावण (सावन) का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। यह पूरा महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित होता है।
ऐसी मान्यता है कि सावन के दिनों में भोलेनाथ धरती पर ही निवास करते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। यानी शिव भक्तों को इस बार भोलेनाथ की भक्ति के लिए पूरे 31 दिनों का समय मिलेगा।

कब शुरू हो रहा है सावन? (तारीख और पंचांग)
हिंदू पंचांग के मुताबिक, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात 8:05 बजे से शुरू हो जाएगी, जो 30 जुलाई को रात 9:30 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि की मान्यता के कारण सावन की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से मानी जाएगी। इसका समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा।

सावन 2026: नोट कर लें चारों सोमवार की तिथियां
सावन के महीने में सोमवार के व्रत का सबसे ज्यादा महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।
इस बार सावन में कुल 4 सोमवार व्रत पड़ेंगे:
- पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
रुद्राभिषेक और पूजा में क्या चढ़ाएं?
सावन में शिवलिंग का अभिषेक करने से विशेष फल मिलता है। अगर आप मंदिर जा रहे हैं या घर पर ही शिव पूजा कर रहे हैं, तो सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा की शुरुआत करें।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री

- शुद्ध जल या गंगाजल
- कच्चा दूध और शहद
- बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला और बिना कटा-फटा)
- धतूरा, भांग और आक के फूल
- चंदन, भस्म और अक्षत (अखंड चावल)
अविवाहित लोग मनचाहे जीवनसाथी की कामना के लिए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। वहीं शादीशुदा लोग अपने दांपत्य जीवन में खुशहाली और संतान की तरक्की के लिए शिव-पार्वती का पूजन करते हैं।
सावन में शिव-पार्वती की पूजा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर शिवजी ने सावन के महीने में ही उन्हें स्वीकार किया था।
इसलिए इस दौरान शिव के साथ-साथ शक्ति की पूजा का भी विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा हमारे मन का कारक होता है।
सावन में नियमित रूप से शिव मंत्रों का जाप और जल अर्पण करने से व्यक्ति का मानसिक तनाव दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
सावन में ध्यान रखने योग्य छोटी-छोटी बातें
- बेलपत्र चढ़ाने का नियम: बेलपत्र का चिकना हिस्सा हमेशा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए।
- सकारात्मक विचार रखें: व्रत के दिन मन में किसी के प्रति कड़वाहट या गुस्सा न लाएं।
- सात्विक खान-पान: सावन के दौरान लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना बेहतर माना जाता है।














