Stress Effects on Body : ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारियां या भविष्य की फिक्र—जीवन में कभी-कभार तनाव होना स्वाभाविक है। किसी मुश्किल वक्त में यह तनाव हमें सतर्क भी करता है।
परेशानी तब शुरू होती है जब चिंता कुछ घंटों में खत्म होने के बजाय हफ्तों या महीनों तक लगातार बनी रहती है। मेडिकल भाषा में इसे क्रॉनिक स्ट्रेस कहते हैं।
इसका मतलब है कि शरीर का ‘अलर्ट सिस्टम’ बंद ही नहीं हो पा रहा है। आइए समझते हैं कि जब स्ट्रेस मोड लगातार ऑन रहता है, तो शरीर के अंदर क्या बदलाव आते हैं।
तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है?
जब भी हम किसी दबाव में होते हैं, दिमाग शरीर को ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में डाल देता है। एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स तेजी से रिलीज होते हैं, सांसें तेज हो जाती हैं और दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
मुश्किल टलते ही शरीर को वापस शांत स्थिति में आना चाहिए। अगर तनाव लगातार बना रहे, तो हार्मोन्स का यह स्तर नीचे नहीं आ पाता और शरीर के कई अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है।
1. दिल और ब्लड प्रेशर पर दबाव
तनाव के दौरान दिल तेजी से धड़कता है और नसें सिकुड़ती हैं। जब यह स्थिति रोज की आदत बन जाती है, तो ब्लड प्रेशर हाई रहने का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय में यह स्थिति दिल की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
2. पेट की गड़बड़ी और खराब पाचन

दिमाग और पेट का सीधा कनेक्शन होता है। ज्यादा तनाव में रहने वाले लोगों को अक्सर एसिडिटी, पेट दर्द, ब्लोटिंग या अपच की शिकायत रहती है। अगर खान-पान ठीक होने के बाद भी पेट खराब रहता है, तो इसकी वजह तनाव हो सकती है।
3. नींद का खराब चक्र
क्रॉनिक स्ट्रेस का सबसे पहला असर नींद पर दिखता है। बिस्तर पर लेटने के बाद भी दिमाग में विचार चलते रहते हैं, जिससे नींद देर से आती है या रात में बार-बार टूटती है। सुबह उठने पर भी शरीर में ताजगी महसूस नहीं होती।
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
स्ट्रेस हार्मोन्स का लगातार बढ़ा रहना शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को धीमा कर देता है। ऐसे में सामान्य सर्दी-जुकाम जल्दी पकड़ लेता है और शरीर की किसी चोट या इन्फेक्शन से रिकवरी में ज्यादा वक्त लग सकता है।
5. मांसपेशियों में खिंचाव और सिरदर्द

अलर्ट मोड में रहने की वजह से कंधे, गर्दन और पीठ की मांसपेशियां अकड़ी रहती हैं। यही खिंचाव आगे चलकर लगातार रहने वाले सिरदर्द या माइग्रेन का कारण बन जाता है।
6. याददाश्त और फोकस में कमी
जब दिमाग 24 घंटे किसी न किसी चिंता में उलझा रहता है, तो जरूरी कामों पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। छोटी-छोटी बातें भूलना, फैसले लेने में परेशानी होना और काम में मन न लगना इसके आम लक्षण हैं।
7. वजन और भूख में असंतुलन
कोर्टिसोल हार्मोन भूख के पैटर्न को बदल सकता है। कुछ लोगों को तनाव में मीठा या तला-भुना खाने की तीव्र इच्छा होती है, जिससे वजन बढ़ता है। वहीं कुछ लोगों की भूख एकदम खत्म हो जाती है।
स्ट्रेस चक्र को कैसे तोड़ें?
- रोज 20 से 30 मिनट हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग जरूर करें।
- सोने से कम से कम 1 घंटा पहले स्क्रीन (मोबाइल, टीवी) से दूरी बनाएं।
- दिनभर में कुछ मिनट गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।
- अपनी बातें किसी करीबी से साझा करें, मन में बातें दबाकर न रखें।
- अगर चिंता रोज के काम, नींद और मूड पर हावी हो रही है, तो किसी काउंसलर या डॉक्टर से सलाह लेने में संकोच न करें।












