Randeep Hooda Career Journey : सिनेमा जगत में अपनी दमदार आवाज और गंभीर अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता रणदीप हुड्डा 20 अगस्त को 50 वर्ष के हो गए हैं।
रोहतक के एक साधारण परिवार से निकलकर वैश्विक स्तर की फिल्मों तक पहुंचना उनके कड़े परिश्रम और कभी हार न मानने वाले जज्बे की कहानी कहता है।
पर्दे पर हर किरदार में जान फूंक देने वाले रणदीप का शुरुआती जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा।
पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर, रणदीप ने चुना अलग रास्ता
रणदीप हुड्डा का जन्म हरियाणा के रोहतक में हुआ था। उनके पिता एक जाने-माने सर्जन और मां सामाजिक कार्यकर्ता थीं। परिवार चाहता था कि रणदीप भी मेडिकल फील्ड में जाएं, लेकिन उनकी रुचि इसमें बिल्कुल नहीं थी।
शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए, जहां उन्होंने मार्केटिंग की पढ़ाई की।
विदेश में खर्च चलाने के लिए किए छोटे-मोटे काम
ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान रहने-खाने का खर्च निकालना आसान नहीं था। आत्मनिर्भर बनने के लिए रणदीप ने एक चाइनीज रेस्तरां में वेटर का काम किया।
इसके अलावा उन्होंने कुछ समय तक टैक्सी चलाई और कार धोने का काम भी किया। इन मुश्किल दिनों ने उन्हें जमीन से जुड़े रहना और मेहनत की कीमत समझना सिखाया।
भारत वापसी और एक्टिंग की शुरुआत
साल 2000 में भारत लौटने के बाद रणदीप ने एक एयरलाइन कंपनी के मार्केटिंग विभाग में नौकरी शुरू की। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने दिल्ली और मुंबई में थिएटर करना जारी रखा और मॉडलिंग में भी हाथ आजमाया।
थिएटर के दौरान ही निर्देशक मीरा नायर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें साल 2001 में आई फिल्म ‘मॉनसून वेडिंग’ में एक एनआरआई का रोल मिला।
‘डी’ से मिली पहचान, फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘डी’ रणदीप के करियर के लिए अहम मोड़ साबित हुई। इसके बाद ‘हाईवे’, ‘सरबजीत’, ‘साहिब बीवी और गैंगस्टर’, ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई’, ‘किक’ और ‘सुल्तान’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
क्रिस हेम्सवर्थ के साथ हॉलीवुड फिल्म ‘एक्सट्रैक्शन’ में उनके एक्शन सीन्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
मेहनत और लगन से बनाई पहचान
संघर्ष के दिनों से निकलकर रणदीप हुड्डा आज हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में शामिल हैं। फिल्मों के अलावा वह कई प्रमुख ब्रांड्स का चेहरा भी हैं।
रणदीप की यह यात्रा यह साबित करती है कि अगर इंसान अपने हुनर पर भरोसा रखे और मेहनत से पीछे न हटे, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।
















