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India Russia Oil Trade : अमेरिकी टैरिफ घटा पर क्या रूसी तेल पर झुका भारत? रूस ने दी सफाई

रूस ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात को कम करने या रोकने का कोई संकेत नहीं दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने भारत के साथ ऊर्जा व्यापार को आपसी हित और वैश्विक बाजार की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया है। यह बयान अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत पर रूसी तेल खरीद बंद करने के कथित दबाव के बीच आया है।

Published On: February 19, 2026 3:34 PM
India Russia Oil Trade

HIGHLIGHTS

  1. रूसी विदेश मंत्रालय ने भारत द्वारा तेल आयात घटाने की खबरों को सिरे से नकारा।
  2. मारिया जखारोवा ने राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दावों को 'आदेश थोपने की कोशिश' बताया।
  3. भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ है, जिसमें रूसी तेल से जुड़ा शुल्क भी शामिल था।
  4. भारत ने अभी तक तेल आयात बंद करने के अमेरिकी दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026। (India Russia Oil Trade) रूस ने भारत द्वारा रूसी तेल के आयात को कम करने या रोकने के अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है कि भारत ने रूस से तेल खरीदने की अपनी स्थिति में कोई बदलाव किया है।

रूस ने भारत के साथ इस व्यापार को पारस्परिक रूप से लाभकारी और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए स्थिरता प्रदान करने वाला बताया है। रूसी विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने पर सहमत हो गया है।

मारिया जखारोवा का तीखा बयान

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा, “हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने पर अपना रुख बदल दिया है। भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों को लाभ पहुंचाती है और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है।”

ज़खारोवा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि इन्होंने स्वतंत्र देशों को आदेश देने का अधिकार खुद ही हथिया लिया है।

टैरिफ और कूटनीतिक दबाव

यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हाल ही में हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद आया है। उस बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।

इस टैरिफ कटौती में वह 25 प्रतिशत का शुल्क हटाना भी शामिल था जो ट्रम्प ने पिछले साल अगस्त में भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया था। पिछले सप्ताह मार्को रुबियो ने दावा किया था कि भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने के लिए प्रतिबद्धता जताई है।

भारत का राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

भारत ने अमेरिका के इस दावे की आधिकारिक तौर पर न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। भारत हमेशा कहता रहा है कि ऊर्जा खरीद के निर्णयों में राष्ट्रीय हित ही मार्गदर्शक कारक बना रहेगा।

मास्को ने पहले भी अमेरिका पर भारत और अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। रूस का कहना है कि अमेरिका प्रतिबंधों और टैरिफ जैसे दबाव के उपकरणों का सहारा ले रहा है।

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Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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