Sawan Nandi Puja : शिव मंदिर में दर्शन करने के बाद नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना बोलना हमारी पुरानी परंपरा का हिस्सा है।
अक्सर लोग मंदिर जाकर सीधे नंदी के कान में अपनी विश बोल आते हैं, लेकिन धर्मशास्त्रों के अनुसार इसका एक खास तरीका और नियम होता है।
यदि आप सही विधि और नियमों का ध्यान रखकर नंदी महाराज के जरिए अपनी बात महादेव तक पहुंचाते हैं, तो पूजा का पूरा फल मिलता है।
नंदी महाराज के कान में बात कहने का सही तरीका
भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने के बाद ही नंदी महाराज के पास जाएं। सीधे जाकर अपनी बात कहने के बजाय इन बातों का ध्यान रखें:
बाएं कान का करें चुनाव: नंदी महाराज के पास जाकर उनके बाएं (लेफ्ट) कान में अपनी बात कहनी चाहिए।
‘ॐ’ का करें उच्चारण: अपनी मनोकामना बताने से ठीक पहले मन में या धीमी आवाज में ‘ॐ’ शब्द का उच्चारण करें। यह शब्द पूजा को पूर्णता और शुभता देता है।
बेलपत्र और स्पर्श: एक हाथ में बेलपत्र लेकर नंदी जी के चरणों को स्पर्श करें और बेहद धीमी आवाज में अपनी बात कहें, ताकि आसपास किसी और को विघ्न न हो।
जल और पुष्प करें अर्पित: अपनी बात पूरी करने के बाद नंदी महाराज को जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें।
क्यों कही जाती है नंदी के कान में मनोकामना?
शिव पुराण और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदी महाराज भगवान शिव के परम भक्त और उनका वाहन हैं। वे हर समय महादेव की भक्ति और ध्यान में लीन रहते हैं।
पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक भगवान शिव ने स्वयं नंदी महाराज को यह वरदान दिया था कि जो भी भक्त सच्चे मन से नंदी के कान में अपनी बात कहेगा, उसकी प्रार्थना महादेव तक जरूर पहुंचेगी।
इसी आस्था के कारण लोग नंदी जी को अपना संदेशवाहक मानकर उनके समक्ष अपनी इच्छा रखते हैं।
ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
- नंदी जी के कान में बोलते समय किसी की बुराई या किसी का अहित करने की इच्छा न मांगें।
- मनोकामना हमेशा शांत मन और एकाग्रता के साथ कहें।
- पूजा संपन्न होने के बाद नंदी महाराज के सामने मत्था टेककर प्रणाम करना न भूलें।














