Kaal Sarp Dosh Upay : सावन के पवित्र महीने में नाग पंचमी का आना शिव भक्तों और ज्योतिषीय उपायों में आस्था रखने वालों के लिए बेहद खास माना जाता है।
जब नाग पंचमी और सावन सोमवार एक ही दिन पड़ते हैं, तो महादेव और नाग देवता दोनों की आराधना का महत्व दोगुना हो जाता है।
ज्योतिष में इस दिन को कालसर्प योग और राहु-केतु से जुड़ी मानसिक या कार्य बाधाओं की शांति के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।
अगर आपकी कुंडली में कालसर्प योग है या जीवन में रुकावटें महसूस हो रही हैं, तो इस दिन सादगी से की गई पूजा विशेष फलदायी हो सकती है।
शिव अभिषेक और नाग पूजन का क्रम
सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें और सबसे पहले भगवान शिव की आराधना से दिन की शुरुआत करें। शिवलिंग पर तांबे या चांदी के लोटे से गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल या कच्चा दूध अर्पित करें।
बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और भस्म चढ़ाकर महादेव का आशीर्वाद लें। शिव पूजन के बाद नाग देवता की तस्वीर या धातु की प्रतिमा के आगे गाय के घी का दीपक जलाएं।
नाग देवता को हल्दी, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित कर प्रणाम करें।
चांदी के नाग-नागिन अर्पण का नियम
ज्योतिषीय परंपरा में कालसर्प योग की शांति के लिए चांदी के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा काफी प्रचलित है।
इस जोड़े को पूजा की थाली में रखकर कच्चा दूध, जल और हल्दी से स्नान कराएं। इसके बाद मन में अपने कष्टों की निवृत्ति की प्रार्थना करते हुए इसे पास के किसी शिव मंदिर में शिवलिंग के समीप या जलहरी पर अर्पित कर दें। यदि चांदी का जोड़ा संभव न हो, तो तांबे का प्रतीक भी प्रयोग किया जा सकता है।
शांति के लिए आसान मंत्र जाप
पूजा के दौरान मन को शांत रखकर मंत्रों का जाप करना सबसे प्रभावी और सरल माध्यम है:
पंचाक्षरी मंत्र: ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार रुद्राक्ष की माला से जाप करें।
नाग गायत्री मंत्र: ‘ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्’ का स्मरण करें।

राहु-केतु शांति: राहु के बीज मंत्र ‘ॐ रां राहवे नमः’ का मानसिक जाप भी किया जा सकता है।
सांप को दूध पिलाने से जुड़ा भ्रम और सावधानी
धार्मिक परंपराओं में नाग देवता को दूध अर्पित करने की बात कही गई है, लेकिन इसका अर्थ जीवित सांप को जबरन दूध पिलाना बिल्कुल नहीं है।

जीव विज्ञान के अनुसार सांप सरीसृप (रेप्टाइल) होते हैं और दूध पीना उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। इसलिए जीवित सांपों को कष्ट देने के बजाय मंदिर में स्थापित प्रतिमा, धातु के नाग या चित्र पर ही दूध और जल के छींटे देकर प्रतीकात्मक पूजा पूरी करें।
कुंडली में कालसर्प योग के बारह अलग-अलग प्रकार होते हैं, इसलिए कोई भी बड़ा अनुष्ठान करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण जरूर करा लें।















