home ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम मनोरंजन बिजनेस ऑटो गैजेट्स खेल हेल्थ लाइफस्टाइल धर्म राशिफल लव राशिफल अंक राशिफल पंचांग करियर ट्रेंडिंग वीडियो

Kishtwar Encounter : 4 फीट बर्फ में भी नहीं डिगी सेना, किश्तवाड़ में बड़ी जीत की इनसाइड स्टोरी

किश्तवाड़ में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों के खात्मे के बाद सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑपरेशन की बड़ी जानकारी साझा की है। डेल्टा फोर्स के जीओसी मेजर जनरल एपीएस बल ने बताया कि यह कामयाबी 16 महीनों की निरंतर मेहनत और खुफिया सूचनाओं का परिणाम है। सेना ने कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के बीच ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में पहली बार सर्दियों में मोर्चा संभाले रखा।

Published On: February 23, 2026 10:52 PM
Kishtwar Encounter : 4 फीट बर्फ में भी नहीं डिगी सेना, किश्तवाड़ में बड़ी जीत की इनसाइड स्टोरी

HIGHLIGHTS

  1. किश्तवाड़ एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद के 3 खूंखार आतंकी ढेर।
  2. यह सैन्य ऑपरेशन पिछले 16 महीनों से चल रही निरंतर ट्रैकिंग का नतीजा।
  3. पहली बार 4 फीट बर्फ और कड़ाके की सर्दी में सेना ने ऊंचाई वाले इलाकों में की तैनाती।
  4. लोकेशन तक पहुंचने में दुर्गम रास्तों के कारण सेना को लगते हैं 6 से 8 घंटे।

Kishtwar Encounter : किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों ने पिछले कई दिनों से जारी ऑपरेशन और जैश के तीन आतंकियों को मार गिराने के बाद आज औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जीओसी मेजर जनरल ए पी एस बल ने मीडिया को बताया कि यह सफलता महज दो दिनों का खेल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया ऑपरेशन पिछले 16 महीनों से जारी निरंतर प्रयासों और कड़ी सैन्य रणनीति का परिणाम है।

जीओसी ने जोर देते हुए कहा कि यह कामयाबी तो सिर्फ “आइसबर्ग का सिरा” है। इसका वास्तविक श्रेय उन गुमनाम योद्धाओं को जाता है जिन्होंने एक साल से अधिक समय तक पर्दे के पीछे रहकर काम किया। सुरक्षाबलों ने आतंकी गतिविधियों के हर इनपुट पर तत्काल कार्रवाई की और लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए। इस दौरान आर्मी डॉग स्क्वॉड ने आतंकियों को ट्रैक करने और उनसे संपर्क साधने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सैन्य अधिकारी ने बताया कि पहली बार सुरक्षाबलों ने कड़ाके की ठंड और 4 फीट बर्फ के बावजूद ऊंचाई वाले इलाकों में अपनी तैनाती बनाए रखी। किश्तवाड़ का यह भौगोलिक क्षेत्र अत्यंत चुनौतीपूर्ण है जहां सटीक सूचना मिलने के बाद भी टीम को पहुंचने में 6 से 8 घंटे लग जाते हैं। कई बार इस देरी का फायदा उठाकर आतंकी ठिकाने खाली कर भागने में सफल हो जाते थे।

16 महीने की लंबी ट्रैकिंग

मेजर जनरल एपीएस बल ने खुलासा किया कि जैश के इन आतंकियों की गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियां डेढ़ साल से नजर रख रही थीं। यह ऑपरेशन केवल हालिया इनपुट पर आधारित नहीं था बल्कि लंबे समय से तैयार की गई खुफिया रणनीति का हिस्सा था।

बर्फबारी में पहली बार तैनाती

जम्मू-कश्मीर के इस ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में सेना ने इस बार अपनी रणनीति बदली है। कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के दौरान भी जवानों ने मोर्चा नहीं छोड़ा। इसी दृढ़ता के कारण आतंकवादियों के छिपने के सुरक्षित ठिकाने अब खत्म हो रहे हैं।

आर्मी डॉग स्क्वॉड का योगदान

दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच आतंकियों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने में सेना के खोजी कुत्तों ने अहम भूमिका निभाई। जीओसी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए इसे तकनीकी और जांबाजी का बेहतरीन मेल करार दिया है।

भौगोलिक चुनौतियां और सटीक एक्शन

किश्तवाड़ की भौगोलिक बनावट ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बनती है। खड़ी चढ़ाई और संकरे रास्तों के कारण सैन्य टुकड़ियों को समय अधिक लगता है। इसके बावजूद सेना ने अपनी कार्यकुशलता से आतंकवादियों को घेरकर उनका सफाया सुनिश्चित किया है।


देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरों (Latest Hindi News) के लिए जुड़े रहें Doon Horizon के साथ। राजनीति (Politics), खेल, मनोरंजन, टेक्नोलॉजी और एजुकेशन से जुड़े हर लाइव अपडेट (Live Updates) और ब्रेकिंग न्यूज़ (Breaking News in Hindi) सबसे पहले पाएं। पढ़िए आपके काम की हर बड़ी खबर, सिर्फ एक क्लिक पर।


Satpreet Singh

सतप्रीत सिंह 'दून हॉराइज़न' में जम्मू-कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ और रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत हैं। घाटी के सुरक्षा हालातों, सीमा पार की हलचल, आतंकवाद विरोधी अभियानों और स्थानीय राजनीति पर उनका गहरा अध्ययन है। संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण, सतप्रीत हमेशा आधिकारिक बयानों और पुख्ता सबूतों पर ही भरोसा करते हैं। उनकी तथ्यपरक (Fact-based) और संतुलित रिपोर्टिंग अफवाहों को रोककर देशवासियों तक कश्मीर की बिल्कुल सही और ग्राउंड-ज़ीरो तस्वीर पेश करती है। पत्रकारिता के प्रति उनका यह जिम्मेदार रवैया उन्हें एक बेहद अथॉरिटेटिव आवाज़ बनाता है।

Leave a Comment