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शिवलिंग पर एक बार नहीं, कई बार जल चढ़ाने की परंपरा क्यों है? जानिए रहस्य

सावन शिवरात्रि के दिन अक्सर मंदिरों में श्रद्धालु एक से अधिक बार जलाभिषेक करते दिखाई देते हैं। शास्त्रों के अनुसार जलाभिषेक की कोई तय संख्या नहीं है, बल्कि आपकी सच्ची भावना और व्यक्तिगत संकल्प ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।

Published On: August 5, 2026 10:47 AM
Sawan Jalabhishek Niyam

Sawan Jalabhishek Niyam : सावन शिवरात्रि का दिन भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन तड़के से ही शिव मंदिरों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजने लगते हैं।

भक्त जल, दूध और बेलपत्र लेकर शिवजी की पूजा करने पहुंचते हैं। यदि आपने कभी मंदिर में ध्यान दिया हो, तो कई श्रद्धालु एक बार जल अर्पित करने के बाद फिर से लोटा भरकर जलाभिषेक करते हैं।

कुछ लोग परिक्रमा के हर चक्कर में जल चढ़ाते हैं, तो कुछ अलग-अलग मनोकामनाओं के साथ।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बार-बार जल चढ़ाना किसी कड़े नियम का हिस्सा है, या यह सिर्फ भक्तों का अपना-अपना भाव है?

शास्त्रों में संख्या नहीं, भाव को माना गया है मुख्य

धार्मिक ग्रंथों और पूजा पद्धतियों में यह कहीं नहीं लिखा है कि शिवरात्रि पर आपको निश्चित संख्या में ही जल चढ़ाना जरूरी है।

शास्त्रों का स्पष्ट कहना है कि भगवान शिव अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देव हैं। उनके लिए पूजा की गिनती या सामग्री से ज्यादा भक्त का सच्चा भाव और मन की पवित्रता मायने रखती है।

अलग-अलग संकल्प और मनोकामनाएं

कई श्रद्धालु अपनी अलग-अलग मन्नतों के लिए बार-बार जल चढ़ाते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई पहली बार में पूरे परिवार के स्वास्थ्य की प्रार्थना करता है, तो दूसरी बार करियर या कारोबार में सफलता के लिए जल अर्पित करता है।

इसके अलावा, कई भक्त मंदिर की परिक्रमा करते समय हर बार शिवलिंग को स्पर्श कर जल चढ़ाते हैं। यही वजह है कि वे एक ही समय में कई बार जलाभिषेक करते नजर आते हैं।

कांवड़ यात्रा और सामूहिक पूजा का प्रभाव

सावन के दौरान दूर-दूर से कांवड़ लेकर आने वाले श्रद्धालु भी इसी तरह पूजा करते हैं। जब कांवड़ियों का समूह मंदिर पहुंचता है, तो परिवार या समूह का हर सदस्य अपने-अपने लोटे से जल अर्पित करता है।

कई बार लोग सुबह के समय जल चढ़ाकर घर लौटते हैं और शाम की आरती में शामिल होकर दोबारा जलाभिषेक करते हैं। इससे ऐसा लगता है कि जलाभिषेक का सिलसिला लगातार चल रहा है।

क्या सिर्फ एक बार जल चढ़ाना काफी है?

यदि आपके मन में यह संशय है कि एक बार जल चढ़ाने से पूजा अधूरी रह जाएगी, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर आप पूरी श्रद्धा और शांत मन से केवल एक बार भी जल अर्पित करते हैं, तो उसका फल भी उतना ही मिलता है।

पूजा में किसी तरह का दबाव या देखा-देखी नहीं होनी चाहिए। आप अपनी सुविधा, समय और भावना के अनुसार एक बार या कई बार जलाभिषेक कर सकते हैं—दोनों ही तरीके पूरी तरह से सही और मान्य हैं।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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