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अल्मोड़ा के जोशी खोला-थपलिया में तेंदुए की सक्रियता, लोगों में बढ़ा डर

Published on: December 15, 2025 11:08 PM
अल्मोड़ा के जोशी खोला-थपलिया में तेंदुए की सक्रियता, लोगों में बढ़ा डर
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उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ी जिले अल्मोड़ा में प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ वन्यजीवों की मौजूदगी भी हमेशा से रही है। यहां घने जंगल शहर की सीमाओं से सटे हुए हैं, जिस वजह से कभी-कभी तेंदुए जैसे जानवर आबादी वाले इलाकों में आ जाते हैं। हाल ही में नगर के जोशी खोला और थपलिया जैसे रिहायशी क्षेत्रों में एक तेंदुए की लगातार दिखने की खबरें सामने आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों के मन में चिंता की लहर दौड़ गई है।

ये कोई नई बात नहीं है। अल्मोड़ा और आसपास के इलाकों में तेंदुए का इंसानों के साथ संघर्ष सालों से चला आ रहा है। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव टकराव की घटनाएं काफी आम हैं, जहां जंगलों का घटता दायरा और बढ़ती आबादी इन जानवरों को शहरों की ओर खींच लाती है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में पिछले कुछ सालों में तेंदुए के हमलों से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं, और अल्मोड़ा जैसे जिलों में यह समस्या खासतौर पर गंभीर रही है।

लोगों ने कैसे उठाई आवाज

इस बार जोशी खोला और थपलिया में तेंदुए को बार-बार घूमते देखा गया। कुछ स्थानीय निवासियों ने तो इसका वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। गांधी पार्क क्षेत्र के पार्षद और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। उन्होंने फौरन वन विभाग के अधिकारियों से बात की और इलाके में सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई।

उनकी मांग थी कि रात के समय नियमित निगरानी हो, पुलिस की मदद से लोगों को सतर्क किया जाए और जरूरत पड़ने पर तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए उपाय किए जाएं।

वन विभाग की तरफ से क्या कार्रवाई

प्रभागीय वन अधिकारी ने लोगों की चिंता को समझा और तुरंत आश्वासन दिया। विभाग की टीम अब रात में इन इलाकों में गश्त कर रही है। स्थिति का जायजा लेने के बाद पिंजरा लगाने का प्लान भी बनाया गया है, ताकि तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए जंगल में वापस भेजा जा सके। वन विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में जानवर को पकड़कर सुरक्षित जगह छोड़ना सबसे अच्छा तरीका होता है।

खुद को सुरक्षित कैसे रखें

स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोगों से सादगी भरी अपील की है। रात में बाहर निकलना सिर्फ जरूरी काम के लिए ही करें। बच्चों और बुजुर्गों के साथ खास सावधानी बरतें, क्योंकि वे ज्यादा कमजोर होते हैं। अगर कोई असामान्य हरकत दिखे, जैसे जानवर की आवाज या निशान, तो फौरन वन विभाग या पुलिस को बताएं।

ये छोटे-छोटे कदम बड़ी घटनाओं को रोक सकते हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में वन्यजीवों के साथ रहना सीखना जरूरी है – जंगल उनका घर है, और हम उनके मेहमान। सतर्कता और जागरूकता से हम दोनों के बीच संतुलन बना सकते हैं।

अगर ऐसी कोई घटना आपके आसपास हो रही हो, तो स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें। प्रकृति के साथ सद्भाव बनाए रखना ही लंबे समय में सबके लिए फायदेमंद होगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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