होमदेशविदेशक्राइममनोरंजनबिज़नेसऑटोमोबाइलगैजेट्सस्पोर्ट्सस्वास्थ्यलाइफस्टाइलधर्मराशिफललव राशिफलअंक राशिफलपंचांगकरियरट्रेंडिंगवीडियो
मौसम 7वां वेतन आयोगसोने का भाव डीए हाईक 2026इंडियन रेलवेगणेश गोदियालमहेंद्र भट्ट पुष्कर सिंह धामी 8वां वेतन आयोगरेसिपीजब्यूटी टिप्सट्रेंडिंग टॉपिक्स

Uttarakhand : उत्तराखंड में डॉक्टरों के लिए नया फरमान, पर्चे पर ये नंबर लिखना अब जरूरी

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्लिनिक, पर्चे और रसीदों पर रजिस्ट्रेशन नंबर व डिग्री साफ तौर पर लिखें। भीमताल निवासी पूर्व कृषि अधिकारी चंद्रशेखर जोशी की सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद विभाग ने यह कड़ा रुख अपनाया है, ताकि मरीजों को डॉक्टर की असल योग्यता पता चल सके।

Published on: January 14, 2026 6:24 PM
Uttarakhand : उत्तराखंड में डॉक्टरों के लिए नया फरमान, पर्चे पर ये नंबर लिखना अब जरूरी
Join Our Whatsapp Channel

HIGHLIGHTS

  • डॉक्टरों को पर्चे और नेमप्लेट पर मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर लिखना अनिवार्य।
  • भीमताल के चंद्रशेखर जोशी की शिकायत (CMHL-112025-11-891129) पर हुई कार्रवाई।
  • इंडियन मेडिकल काउंसिल रेगुलेशन-2002 के नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई।
  • स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी जिला अधिकारियों को निगरानी के आदेश जारी किए।

देहरादून : उत्तराखंड के मरीजों के लिए यह खबर बेहद अहम है। अब इलाज करने वाले डॉक्टर की असल योग्यता और मेडिकल काउंसिल में उसका पंजीकरण जानना आपका अधिकार होगा।

राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने डॉक्टरों द्वारा नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि मरीजों को भ्रमित करने वाली जानकारियां देने पर डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एक शिकायत से हरकत में आया सिस्टम

भीमताल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व कृषि अधिकारी चंद्रशेखर जोशी की जागरूकता ने पूरे राज्य की चिकित्सा व्यवस्था पर असर डाला है। जोशी ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत संख्या CMHL-112025-11-891129 (दिनांक 14.11.2025) दर्ज कराई थी।

उन्होंने शासन को बताया कि कई डॉक्टर अपने क्लिनिक और दस्तावेजों पर मान्य डिग्रियां सही तरीके से प्रदर्शित नहीं कर रहे हैं। इससे आम जनता को यह पता ही नहीं चलता कि उनका इलाज कर रहा डॉक्टर वास्तव में कितना योग्य है।

क्या कहते हैं मेडिकल काउंसिल के नियम?

स्वास्थ्य महानिदेशालय ने शिकायत की जांच में पाया कि कई जगहों पर इंडियन मेडिकल काउंसिल (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations-2002 के पैरा 1.4.1 और 1.4.2 का पालन नहीं हो रहा है। नियमों के मुताबिक, हर डॉक्टर को अपने क्लिनिक के बोर्ड, प्रिस्क्रिप्शन पैड, सर्टिफिकेट और रसीदों पर राज्य मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर लिखना अनिवार्य है।

डॉक्टर अपने नाम के साथ सिर्फ वही डिग्री या डिप्लोमा लिख सकते हैं, जो मान्यता प्राप्त हैं। भ्रामक या गैर-मान्यता प्राप्त डिग्रियां लिखकर मरीजों का भरोसा जीतना नियमों के खिलाफ है। जोशी का कहना है कि पारदर्शिता से ही चिकित्सा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कायम रह सकता है।

जिला स्तर पर सख्त निगरानी के निर्देश

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने पत्र संख्या 24/राजयो/13/2025 के जरिए सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेश भेज दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी डॉक्टरों को नियमों के पालन के लिए सचेत करें।

विभाग ने साफ किया है कि भविष्य में अगर कोई डॉक्टर अपनी योग्यता और पंजीकरण संख्या छिपाता है या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जाएगी। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के जरिए आई इस शिकायत ने साबित किया है कि एक नागरिक की सतर्कता भी व्यवस्था में सुधार ला सकती है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Leave a Reply

Discover more from Doon Horizon

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading