Sawan Bhumi Pujan Niyam : नया घर बनाना हर किसी के जीवन का एक बड़ा सपना होता है। जब भी कोई नया निर्माण शुरू होता है, तो सबसे पहले शुभ मुहूर्त और समय का ध्यान रखा जाता है।
सावन का महीना शुरू होते ही कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इस दौरान मकान की नींव रखना सही रहेगा? अक्सर लोग चातुर्मास की वजह से असमंजस में पड़ जाते हैं, क्योंकि इन चार महीनों में मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।
अगर आप भी सावन के महीने में अपने सपनों के आशियाने की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो इससे जुड़े धार्मिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझना जरूरी है।
क्या सावन में घर की नींव रखना शुभ है?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन के महीने में मकान की नींव डालना या गृह निर्माण शुरू करना पूरी तरह से शुभ माना गया है।
शास्त्रों में ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में गृह निर्माण से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन सावन मास में नींव रखने, निर्माण कार्य शुरू करने या गृह प्रवेश करने में कोई दोष नहीं होता।
चातुर्मास के दौरान भले ही भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, लेकिन इस समय सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव के पास होता है।
सावन साक्षात शिव स्वरूप माना गया है। ऐसे में महादेव का आशीर्वाद लेकर नया काम शुरू करना तरक्की और सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है।
फिर क्यों उठते हैं सावन में निर्माण न करने के सवाल?
अक्सर लोग विवाह या अन्य शुभ कार्यों की तरह गृह निर्माण को भी सावन में टालने की बात करते हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
मांगलिक कार्यों पर रोक: सावन में शादी-विवाह और मुंडन जैसे 16 संस्कार वर्जित होते हैं। लोग इसी नियम को गृह निर्माण से भी जोड़ लेते हैं, जबकि शास्त्रों में नींव डालने पर ऐसी रोक नहीं है।
मौसम और बारिश का डर: यह मुख्य रूप से एक व्यावहारिक कारण है। सावन में तेज बारिश होती है।
अगर ऐसे में गड्ढा खोदकर नींव डाली जाए, तो उसमें पानी भरने का खतरा रहता है, जिससे ढांचा कमजोर हो सकता है। इसी वजह से पुराने समय में बारिश के दौरान नींव खोदने से मना किया जाता था।
भूमि पूजन के लिए सही तिथि, दिन और नक्षत्र
अगर मौसम अनुकूल है और आप सावन में नींव रखने का मन बना चुके हैं, तो पंचांग के हिसाब से सही मुहूर्त चुनना जरूरी है।
शुभ तिथियां
गृह निर्माण और भूमि पूजन के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा तिथि को बहुत उत्तम माना जाता है।
(ध्यान रखें: प्रतिपदा, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या के दिन भूमि पूजन करने से बचें।)
शुभ दिन
नींव डालने या भूमि पूजन के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार सबसे अच्छे माने जाते हैं।
(मंगलवार, शनिवार और रविवार को नींव का काम शुरू न करें।)
उत्तम नक्षत्र
भूमि पूजन के लिए रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, हस्त, चित्रा, स्वाति, रेवती और धनिष्ठा नक्षत्र बहुत शुभ फल देने वाले माने जाते हैं।
काम शुरू करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
जल निकासी का प्रबंध: नींव खोदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि अचानक बारिश होने पर पानी निकालने का सही रास्ता हो।
सॉयल टेस्टिंग: बारिश के मौसम में मिट्टी की पकड़ ढीली हो जाती है, इसलिए नींव की गहराई का विशेष ध्यान रखें।
योग्य पंडित से सलाह: अपनी राशि और स्थानीय पंचांग के अनुसार सटीक चौघड़िया और मुहूर्त निकालकर ही पहला फावड़ा चलाएं।



















