Guru Purnima Dohas : जीवन में सही-गलत का भेद सिखाने और अज्ञानता के अंधेरे से बाहर निकालने में गुरु की भूमिका सबसे अहम होती है।
सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा यानी व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
यह दिन उन सभी गुरुओं, शिक्षकों और मेंटर्स को धन्यवाद देने का है जिन्होंने हमें जीवन जीना सिखाया।
अगर आप भी इस गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं, तो साधारण मैसेज के बजाय संत कबीर के इन प्रसिद्ध दोहों, पावन श्लोक और सुंदर शुभकामना संदेशों का सहारा ले सकते हैं।
गुरु महिमा को दर्शाते संत कबीर के कालजयी दोहे
1. गुरु और ईश्वर में श्रेष्ठता का भाव
दोहा:
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
अर्थ: यदि गुरु और ईश्वर दोनों एक साथ सामने खड़े हों, तो पहले किसके चरण स्पर्श करने चाहिए? कबीरदास जी कहते हैं कि पहले गुरु के चरणों में शीश झुकाना चाहिए, क्योंकि गुरु की कृपा से ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग मिलता है।
2. गुरु के अनंत उपकार का वर्णन
दोहा:
सब धरती कागद करूं, लेखनि सब बनराय।
सात समुंदर की मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाय।।
अर्थ: पूरी धरती को अगर कागज बना दिया जाए, जंगलों की लकड़ियों को कलम और सातों समुद्रों के जल को स्याही बना लिया जाए, तब भी गुरु के गुणों और उनके उपकारों का पूरा वर्णन नहीं किया जा सकता।

गुरु वंदना का सबसे पावन श्लोक
श्लोक:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुः देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
अर्थ: गुरु ही सृजनकर्ता ब्रह्मा हैं, गुरु ही पालनकर्ता विष्णु हैं और गुरु ही संहारक भगवान शिव (महेश) हैं। गुरु ही साक्षात परम ब्रह्म हैं, ऐसे श्री गुरुदेव को मैं बारंबार प्रणाम करता हूं।
अपने गुरुदेव को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
“आपका ज्ञान और मार्गदर्शन हमेशा मेरे जीवन की राह रोशन करता रहे। आपको गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!”
“जिस गुरु ने अज्ञान के अंधेरे से निकालकर ज्ञान का प्रकाश दिया, ऐसे गुरुदेव के चरणों में मेरा सादर प्रणाम।”
“जिसके जीवन पर गुरु का हाथ और आशीर्वाद होता है, सफलता उसके कदम खुद-ब-खुद चूमती है।”
“ईश्वर को खोजने का सबसे सरल और पावन रास्ता गुरु के चरणों से होकर ही गुजरता है।”
“गुरु केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि हमें एक बेहतर इंसान बनने और जीवन को समझने का जरिया देते हैं।”
गुरु पूर्णिमा पर जरूर करें ये 4 काम
गुरु दर्शन व पूजन: यदि संभव हो तो इस दिन अपने गुरु के पास जाकर उनके चरण स्पर्श करें और उनका आशीर्वाद लें।
संस्कार और संकल्प: गुरु द्वारा दी गई सीख और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
दान-पुण्य: इस शुभ तिथि पर जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या पढ़ाई से जुड़ी सामग्री का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
विद्या का सम्मान: किताबों, कलम और अपने ज्ञान के साधनों का आदर करें और दूसरों को शिक्षित करने का प्रयास करें।



















