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1970 के बाद पहली बार आई ऐसी गुरु पूर्णिमा, जानिए इस दुर्लभ संयोग का धार्मिक महत्व

आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि यानी गुरु पूर्णिमा पर इस बार 56 साल बाद एक बेहद खास महासंयोग बन रहा है। इस दिन गुरु-आदित्य राजयोग और ग्रहों की अनुकूल स्थिति में स्नान-दान और विष्णु पूजन करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि मिलती है।

Published On: July 29, 2026 11:06 AM
Guru Purnima Puja Muhurat

Guru Purnima Puja Muhurat : भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरुओं, मेंटर्स और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है।

आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पावन दिन इस बार ग्रहों की एक बहुत ही खास स्थिति के कारण और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार गुरु पूर्णिमा पर ठीक 1970 के बाद यानी 56 साल बाद ऐसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जिसमें पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

क्यों खास है इस बार की गुरु पूर्णिमा?

इस दिन आकाश मंडल में ग्रहों का एक दुर्लभ तालमेल देखने को मिल रहा है। कर्क राशि में सूर्य और गुरु एक साथ विराजमान होकर गुरु-आदित्य राजयोग बना रहे हैं।

ज्योतिष में सूर्य को प्रतिष्ठा व आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है और गुरु को ज्ञान व बुद्धि का। इन दोनों का एक साथ आना जीवन में मान-सम्मान और तरक्की के द्वार खोलता है।

इसके साथ ही, कर्मफल दाता शनि और भाग्य के कारक गुरु की परस्पर शुभ स्थिति से लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होने के योग बन रहे हैं।

पूर्णिमा तिथि और पूजा के शुभ मुहूर्त

उदया तिथि के नियम के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को मनाया जा रहा है। दिन भर पूजा और दान-पुण्य के लिए कई शुभ समय उपलब्ध हैं:

विजय मुहूर्त: शाम 04:29 बजे से शाम 05:30 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 09:34 बजे से रात 09:51 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या: शाम 09:34 बजे से रात 10:26 बजे तक

चंद्रोदय समय: रात 09:53 बजे

स्नान, दान और पूजा की आसान विधि

इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना का विशेष महत्व है। सुबह की शुरुआत और शाम के समय इन बातों का ध्यान रखें:

1. पवित्र स्नान और संकल्प

सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद अपने गुरुओं का ध्यान करते हुए दिन की शुरुआत करें।

2. इन चीजों का करें दान

कुंडली में गुरु ग्रह (बृहस्पति) को मजबूत करने और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पीले वस्त्र, चने की दाल, गुड़, शुद्ध देसी घी और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।

3. चंद्रदेव को अर्घ्य

रात में चंद्रोदय (09:53 बजे) के बाद चांदी के लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें।

मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन में स्थिरता आती है।

व्रत और पूजन से मिलने वाले लाभ

आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत और पूजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से चंद्र दोष से राहत मिलती है, पारिवारिक जीवन में मिठास आती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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