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गुरु पूर्णिमा पर घर में व्यासपीठ बनाकर करें गुरु पूजा, जानें सही विधि और महत्व

गुरु पूर्णिमा के दिन घर पर व्यासपीठ स्थापित करके पूजन करने का विशेष धार्मिक महत्व है। यदि आप आश्रम या गुरु स्थान नहीं जा पा रहे हैं, तो बहुत सरल विधि से घर पर ही व्यासपीठ तैयार कर गुरु कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

Published On: July 28, 2026 2:38 PM
Guru Purnima Vyaspeeth

Guru Purnima Vyaspeeth : धार्मिक ग्रंथों और कथा-प्रसंगों में आपने अक्सर देखा होगा कि जहां बैठकर व्यास जी या कथावाचक कथा सुनाते हैं, उस ऊंचे आसन को व्यासपीठ कहा जाता है।

सनातन परंपरा में व्यासपीठ को सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र पद माना गया है। यह स्थान महर्षि वेदव्यास को समर्पित होता है, जिन्हें चारों वेदों का ज्ञान देने के कारण संसार का प्रथम गुरु भी कहा गया है।

गुरु पूर्णिमा के खास अवसर पर भक्त अपने गुरुदेव का आशीर्वाद लेने के लिए आश्रमों में जाते हैं। हालांकि, यदि आप किसी कारणवश आश्रम नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही पवित्र व्यासपीठ की स्थापना कर पूजन कर सकते हैं।

व्यासपीठ बनाने की सरल और प्रामाणिक विधि

घर के किसी स्वच्छ स्थान या पूजा घर में व्यासपीठ तैयार करना बहुत आसान है:

चौकी की स्थापना: सबसे पहले एक साफ-सुथरी लकड़ी की चौकी रखें।

श्वेत वस्त्र: चौकी के ऊपर स्वच्छ सफेद कपड़ा बिछाएं।

रेखांकन का विधान: अब इस कपड़े पर पूर्व से पश्चिम की ओर 12 रेखाएं और उत्तर से दक्षिण की ओर 12 रेखाएं खींचें।

दिग्बंधन: इसके बाद दसों दिशाओं का ध्यान करते हुए अक्षत (चावल) छिड़कें। इसे धार्मिक भाषा में दिग्बंधन कहा जाता है, जिससे स्थान पवित्र और सुरक्षित होता है।

इस प्रक्रिया के बाद आपकी व्यासपीठ पूजन के लिए तैयार हो जाती है।

गुरु न हों तो किसे मानें अपना गुरु?

अगर आपने अभी तक किसी को गुरु नहीं बनाया है या आपके गुरु उपस्थित नहीं हैं, तो शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव (आदिगुरु), भगवान दत्तात्रेय या अपने इष्टदेव को गुरु मानकर पूजन किया जा सकता है।

इसके अलावा हमारे माता-पिता और प्रथम शिक्षक भी गुरु तुल्य ही हैं, जिनका पूजन और सम्मान इस दिन बेहद फलदायी माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा पूजन की मुख्य बातें

गुरु दर्शन व सेवा: यदि आपके गुरु प्रत्यक्ष उपलब्ध हैं, तो उनके दर्शन करें और अपने अवगुणों को उनके चरणों में त्यागने का संकल्प लें।

भेंट व दक्षिणा: इस दिन गुरुदेव को नए वस्त्र, ऋतुफल, मिष्ठान और यथाशक्ति दक्षिणा अर्पित करने की परंपरा है।

गुरु मंत्र का नियम: यदि आप इस दिन गुरु दीक्षा ले रहे हैं, तो गुरुदेव से मंत्र प्राप्त करें। इसके बाद जीवन में कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले उस गुरु मंत्र का स्मरण अवश्य करें।

सत्यनारायण कथा: मान्यता है कि गुरु पूजन के साथ इस दिन घर में भगवान श्री सत्यनारायण की कथा और पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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