LIC Single Premium Plan : सुरक्षित निवेश के साथ जीवन बीमा का सुरक्षा कवच चाहने वाले निवेशकों के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation) की सिंगल प्रीमियम एंडोमेंट योजना एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरती है। अमूमन पारंपरिक बीमा पॉलिसियों में हर महीने, तिमाही या साल दर साल प्रीमियम भरने की बाध्यता रहती है। इसके उलट, इस व्यवस्था में निवेशक को अपनी जेब से केवल एक बार एकमुश्त पूंजी लगानी होती है।
कैसे काम करता है 93 हजार से 5.45 लाख का गणित?
अगर 25-30 वर्ष का कोई व्यक्ति 2 लाख रुपये के सम एश्योर्ड (Sum Assured) के साथ 25 साल की अवधि चुनता है, तो टैक्स सहित उसे करीब ₹93,193 का सिंगल प्रीमियम जमा करना पड़ता है। 25 साल पूरे होने पर पॉलिसीधारक को मूल सम एश्योर्ड के साथ एलआईसी द्वारा समय-समय पर घोषित साधारण रिवर्सनरी बोनस (Simple Reversionary Bonus) और फाइनल एडिशनल बोनस (Final Additional Bonus) का भुगतान किया जाता है।
यही दोनों बोनस जुड़कर अंतिम मैच्योरिटी रकम को करीब ₹5.45 लाख तक पहुंचा देते हैं। लेकिन एक पेच याद रखना जरूरी है—बोनस की दरें पूरी तरह से निगम के वित्तीय प्रदर्शन पर निर्भर करती हैं, इसलिए रिटर्न में मामूली अंतर संभव है।
कौन ले सकता है यह पॉलिसी और न्यूनतम निवेश कितना?
इस योजना में प्रवेश की पात्रता बेहद लचीली रखी गई है। 90 दिन के नवजात से लेकर 65 वर्ष तक का कोई भी व्यक्ति इसका हिस्सा बन सकता है। पॉलिसी का कार्यकाल 10 वर्ष से लेकर अधिकतम 25 वर्ष तक चुनने की सुविधा मिलती है।
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹50,000 तय है, जिसके लिए सिंगल प्रीमियम और भी कम बैठता है। वहीं, अधिकतम निवेश पर निगम की ओर से कोई सीमा तय नहीं की गई है; निवेशक अपनी वित्तीय क्षमता और आय के वैध स्रोतों के हिसाब से कितनी भी बड़ी राशि लगा सकता है।
बच्चों के नाम पर पॉलिसी और डेथ बेनेफिट के नियम
अक्सर माता-पिता बच्चों के भविष्य और उच्च शिक्षा की खातिर ऐसी योजनाओं में पैसा लगाते हैं। यदि पॉलिसी किसी छोटे बच्चे के नाम ली गई है, तो रिस्क कवर तुरंत शुरू नहीं होता। नियम के मुताबिक, बच्चे की उम्र 8 वर्ष पूरी होने पर या पॉलिसी शुरू होने के 2 साल बाद (जो भी पहले आए), लाइफ रिस्क कवर प्रभावी माना जाता है।
दुर्भाग्यवश, यदि पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक का निधन हो जाता है, तो नॉमिनी को पूरा सम एश्योर्ड और उस समय तक अर्जित बोनस बिना किसी विवाद के सौंप दिया जाता है। इसके अलावा, पॉलिसी के एक वर्ष पूरे होने के बाद जरूरत पड़ने पर इस पर लोन लेने का विकल्प भी खुला रहता है।










