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माफियाओं का खेल खत्म, धामी सरकार ने खनन से की ₹1217 करोड़ की रिकॉर्ड कमाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पारदर्शी खनन नीति ने उत्तराखंड में राजस्व प्राप्ति के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि खनन अब माफियाओं के चुंगल से निकलकर राज्य की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।

माफियाओं का खेल खत्म, धामी सरकार ने खनन से की ₹1217 करोड़ की रिकॉर्ड कमाई

HIGHLIGHTS

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹950 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1217 करोड़ का भारी-भरकम राजस्व हासिल हुआ।
  • अवैध खनन रोकने के लिए ई-रवन्ना प्रणाली में विशेष सिक्योरिटी फीचर युक्त पेपर लागू किया गया।
  • केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को 'सी' श्रेणी में दूसरा स्थान देते हुए ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।

देहरादून, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में खनन क्षेत्र की सूरत बदलकर रख दी है, जिससे कभी माफियाओं का चारागाह रहा यह विभाग अब प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने का मुख्य जरिया बन गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हालिया आंकड़ों को राज्य हित में सुखद बताते हुए मुख्यमंत्री की पारदर्शी नीतियों पर मुहर लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और कठोर प्रवर्तन के चलते ही राजस्व में यह अभूतपूर्व वृद्धि संभव हो सकी है।

भट्ट ने सीएम पुष्कर सिंह धामी का आभार जताते हुए कहा कि सरकारी खजाने में आ रहा यह पैसा प्रदेश के विकास कार्यों में नई जान फूंकेगा। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान खनन विभाग ने अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाते हुए ₹1217 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। गौरतलब है कि इसके लिए सरकार ने ₹950 करोड़ का लक्ष्य तय किया था, जिसे विभाग ने काफी पहले ही पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पूर्ववर्ती वर्षों की तुलना में यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।

अतीत के पन्ने पलटते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि साल 2012-13 में राज्य का खनन राजस्व महज ₹110 करोड़ के आसपास सिमटा हुआ था। पिछले साल यानी वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विभाग ने ₹875 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1041 करोड़ की कमाई कर अपनी काबिलियत सिद्ध की थी। यह निरंतर वृद्धि दर्शाती है कि धामी सरकार ने खनन के पुराने और जटिल नियमों को सरल बनाकर वैध खनन को प्रोत्साहित किया है।

इस सफलता के पीछे तकनीकी सुधारों की बड़ी भूमिका रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ई-रवन्ना प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए विशेष सिक्योरिटी फीचर वाले कागज का इस्तेमाल शुरू किया गया। इस कदम से फर्जीवाड़े और ई-ट्रांजिट पास के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम लग गई है। अवैध परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियान ने माफियाओं के हौसले पस्त कर दिए हैं, जिससे निजी लाभ की जगह सरकारी खजाने में पैसा पहुंचना सुनिश्चित हुआ।

उत्तराखंड के इन नवाचारों को केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है। बीते 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्य की ‘MDTSS’ और ‘ई-खन्ना सिक्योरिटी पेपर’ परियोजनाओं को प्रतिष्ठित स्कोच अवार्ड (Skoch Award) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रदेश में हो रहे डिजिटल सुधारों की पुष्टि करता है।

इतना ही नहीं, खान मंत्रालय भारत सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को ‘सी’ श्रेणी के राज्यों में पूरे देश में दूसरा स्थान मिला है। इस उपलब्धि के लिए राज्य को ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली। इसके साथ ही ‘State Mining Readiness Index’ में बेहतर रैंकिंग हासिल करने पर ₹100 करोड़ की एक और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि राज्य के खाते में आई है। कुल मिलाकर ₹200 करोड़ की यह इंसेंटिव राशि धामी सरकार के सुशासन का सीधा प्रमाण है।

महेंद्र भट्ट ने अंत में दोहराया कि पारदर्शिता, तकनीकी सशक्तिकरण और जीरो टॉलरेंस की नीति ने खनन क्षेत्र को एक नई दिशा दी है। बीजेपी मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान के माध्यम से जारी इस बयान में कहा गया कि राज्य अब सुशासन के एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां संसाधनों का उपयोग व्यक्तिगत हितों के बजाय सार्वजनिक कल्याण के लिए किया जा रहा है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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