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नशीली दवाओं की बिक्री पर कसेगा शिकंजा, मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे अब जरूरी

देहरादून जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशे की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों का जीआईएस विश्लेषण करने के आदेश दिए। इसके तहत स्कूलों में एंटी-ड्रग्स पाठ्यक्रम शामिल करने, मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी लगाने और मानकों का उल्लंघन करने वाले नशा मुक्ति केंद्रों को सील करने की सख्त हिदायत दी गई है।

नशीली दवाओं की बिक्री पर कसेगा शिकंजा, मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे अब जरूरी

HIGHLIGHTS

  • नशे के हॉटस्पॉट चिन्हित करने को जीआईएस विश्लेषण होगा।
  • सेलाकुई में 30 बेड का नशा मुक्ति केंद्र बनेगा।
  • स्कूलों में पढ़ाया जाएगा एंटी-ड्रग्स और साइबर क्राइम।
  • 151 मुकदमों में 170 ड्रग्स तस्कर जेल भेजे गए।

देहरादून, 24 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

युवाओं को नशीले पदार्थों के जाल में फंसाने वाले तस्करों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ देहरादून जिला प्रशासन ने पूरी तरह से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (एनसीओआरडी) की समीक्षा बैठक के दौरान प्रवर्तन एजेंसियों को दोटूक निर्देश जारी किए।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करना सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर परिवारों और युवाओं के भविष्य को बचाने का मामला है।

पुलिस विभाग को पुराने आपराधिक आंकड़ों के आधार पर जीआईएस विश्लेषण करने के आदेश दिए गए हैं। इस मैपिंग के जरिए उन तमाम संवेदनशील इलाकों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा जहां नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री अधिक होती है। चाय-तंबाकू की ठेलियों, स्लम बस्तियों और संदिग्ध मेडिकल स्टोर्स पर लगातार पैनी नजर रखी जाएगी।

ई-ड्रग्स और सिंथेटिक केमिकल ड्रग्स के बढ़ते चलन को समाज के लिए बेहद खतरनाक माना गया है। इस सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने के लिए एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, आबकारी, एनसीबी और औषधि विभाग को मिलकर संयुक्त अभियान चलाने को कहा गया है। किसी भी एजेंसी की व्यक्तिगत कार्रवाई के बजाय एकीकृत रणनीति बनाकर काम करने पर जोर दिया गया।

स्कूली स्तर पर ही बच्चों को जागरूक करने के लिए बड़े नीतिगत बदलाव की रूपरेखा तैयार की गई है। अब जनपद के विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ एंटी-ड्रग्स, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे विषयों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हॉस्टलों, पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों, कोचिंग सेंटरों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही सरकार की एंटी ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 का हर शैक्षणिक संस्थान में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है ताकि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें।

नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रुख अपनाया जा रहा है। सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी केंद्र निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत प्रभाव से सील करने की कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के मकसद से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सेलाकुई क्षेत्र में 30 बेड क्षमता वाले नए सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव शासन को तुरंत भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों के खिलाफ भी चालानी कार्रवाई तेज की जाएगी।

जिला प्रशासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि जनपद में कुल 84 पंजीकृत और दो अपंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र चिन्हित किए गए थे। भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया में 23 केंद्र पहले ही बंद पाए गए, जबकि 15 सेंटरों में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई की गई। अन्य 55 केंद्रों की विस्तृत रिपोर्ट राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजी गई है।

क्षेत्रीय पुलिस की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ 151 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए 170 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान 711 संदिग्ध छात्रों के ड्रग्स टेस्ट के नमूने लिए गए थे। जांच के बाद इन सभी नमूनों की रिपोर्ट नकारात्मक आई है। हेल्पलाइन 1933 पर मिलने वाली हर एक कॉल और शिकायत पर तुरंत पुलिस टीमें भेजकर निस्तारण कराया जा रहा है।

ड्रग्स इंस्पेक्टर ने बैठक में बताया कि जिले के तमाम मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की मौजूदगी के किसी भी तरह की दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। नियम तोड़ने वाली दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

रायवाला स्थित राजकीय नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की क्षमता विस्तार को भी हरी झंडी मिल चुकी है। वर्तमान में 15 बेड की क्षमता से चल रहे इस केंद्र को 30 बेड तक बढ़ाने की प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है, जिसका निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।

इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर जिलाधिकारी स्मृत परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, उच्च शिक्षा विभाग से डॉ. दीपा मेहरा रावत, पुलिस क्षेत्राधिकारी जगदीश पंत, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूड़ी, एआरटीओ रत्नाकर सिंह, एसीएफ अभिषेक मैठाणी, आबकारी विभाग से शिव प्रसाद व्यास सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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