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Nag Panchami : नाग पंचमी पर जानें नागों की अधिष्ठात्री देवी का रहस्य, भगवान शिव से जुड़ा है इनका गहरा धार्मिक नाता

नाग पंचमी के पावन अवसर पर भगवान शिव के साथ-साथ सांपों की अधिष्ठात्री देवी मां मनसा की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन शुभ मुहूर्तों में विधि-विधान से पूजन करने पर सर्पदोष और कालसर्प दोष से राहत मिलती है।

Published On: August 17, 2026 10:38 AM
Nag Panchami

Nag Panchami : सावन के महीने में नाग पंचमी का पर्व विशेष महत्व रखता है, खासकर तब जब यह दिन सावन के सोमवार के साथ जुड़ जाए।

शास्त्रों में इस दिन भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ नाग देवता और सांपों की अधिष्ठात्री देवी मां मनसा की आराधना का विशेष विधान बताया गया है।

मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करने पर घर-परिवार में सुरक्षा, सुख-समृद्धि बनी रहती है और भय से मुक्ति मिलती है।

कौन हैं मां मनसा देवी और क्या है शिव जी से नाता?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां मनसा को भगवान शिव की मानस पुत्री माना जाता है। इन्हें नागों की माता, पद्मा और ‘विषहरी’ के नाम से भी जाना जाता है। विषहरी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि देवी भक्तों को जहरीले जीवों के भय और सर्पदंश से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

यूं तो इनकी पूजा सामान्यतः शिव परिवार के साथ सीधे रूप में कम ही दिखती है, लेकिन जनमानस में इन्हें रक्षा, संतान-सुख और सुख-समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है।

उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित मां मनसा देवी का मंदिर सिद्धपीठ माना जाता है, जहां नाग पंचमी के दिन दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

कालसर्प दोष और भय से मुक्ति की मान्यता

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से नाग पंचमी का दिन कालसर्प दोष के निवारण के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

जिनकी कुंडली में यह दोष हो या जिन्हें बार-बार अनजाना डर सताता हो, वे इस दिन मां मनसा देवी और नाग देवता की विशेष उपासना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।

नाग पंचमी पर पूजन के प्रमुख शुभ मुहूर्त

इस दिन पूजा-अर्चना के लिए दिनभर कई शुभ चौघड़िया और योग उपलब्ध रहते हैं:

  • अमृत योग: सुबह 05:50 बजे से सुबह 07:29 बजे तक
  • शुभ योग: सुबह 09:08 बजे से सुबह 10:46 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
  • लाभामृत योग: दोपहर 03:42 बजे से शाम 06:59 बजे तक

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

घर पर या मंदिर में पूजा करने से पहले ये सामग्री जरूर रख लें:

  • कच्चा दूध और गंगाजल
  • नाग देवता का चित्र या धातु की छोटी प्रतिमा
  • चंदन, अक्षत (बिना टूटे चावल), कुमकुम और कपूर
  • सफेद या पीले ताजे फूल
  • मौसमी फल और मिष्ठान्न

सरल पूजा विधि

सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें। सबसे पहले भगवान शिव का तांबे या पीतल के लोटे से जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करें।

इसके बाद नाग देवता और मां मनसा का ध्यान करते हुए उन्हें चंदन, कुमकुम, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें।

नाग देवता को कच्चे दूध का भोग लगाएं, धूप-दीप जलाएं और सुख-समृद्धि व रक्षा की प्रार्थना करें। अंत में कर्पूर से आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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