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Nag Panchami Mahatva : भगवान शिव के गले में ही नाग क्यों? नाग पंचमी पर जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा

नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा परिवार की सुरक्षा, सुख-शांति और प्रकृति के संतुलन के प्रतीक के रूप में की जाती है। भगवान शिव के गले में सुशोभित वासुकी नाग भय पर विजय, ऊर्जा नियंत्रण और हर जीव के सम्मान का संदेश देता है।

Published On: August 17, 2026 10:48 AM
Nag Panchami Mahatva

Nag Panchami Mahatva : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन समय माना जाता है। इसी महीने आने वाली नाग पंचमी शिव भक्तों के लिए विशेष स्थान रखती है।

इस साल नाग पंचमी का पर्व सावन सोमवार के दिन पड़ने से इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दोगुना हो गया है। भारतीय संस्कृति में जीव-जंतुओं और प्रकृति को हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा गया है।

नाग पंचमी का दिन न केवल नाग देवता के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है, बल्कि यह परिवार की सुरक्षा, भयमुक्ति और पर्यावरण के साथ तालमेल बिठाने की सीख भी देता है।

शिवजी के गले में नाग का क्या रहस्य है?

धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के गले में विराजमान नाग का नाम ‘वासुकी’ है। समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग ने मंदराचल पर्वत को मथने के लिए रस्सी का काम किया था।

उनकी निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अपने गले में आभूषण के रूप में स्थान दिया। आध्यात्मिक नजरिए से देखें तो सांप को विष, भय और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है।

महादेव का इसे गले में धारण करना दर्शाता है कि वे भय और मृत्यु से परे हैं। वे विषैली और विनाशकारी ऊर्जा को भी शांत रखने की शक्ति रखते हैं। यह स्वरूप हमें सीख देता है कि जीवन में अपने क्रोध, डर और नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण रखना कितना आवश्यक है।

नाग पंचमी पर क्यों की जाती है पूजा?

प्राचीन काल से ही नागों को खेतों का रक्षक माना जाता रहा है, क्योंकि वे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और चूहों को नियंत्रित करते हैं।

धार्मिक रूप से मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

इस दिन लोग नाग देवता की प्रतिमा या दीवार पर उनका चित्र बनाकर रोली, अक्षत, फूल और भोग अर्पित करते हैं।

सावन सोमवार के साथ कैसे करें पूजा?

नाग पंचमी और सावन सोमवार का एक साथ होना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन सरल विधि से पूजा संपन्न की जा सकती है:

सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं और बेलपत्र अर्पित करें। नाग देवता की मिट्टी या धातु की प्रतिमा, अथवा चित्र पर जल छिड़कें और चंदन-फूल लगाएं।

‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नागदेवताय नमः’ मंत्र का शांत मन से जप करें। परिवार की शांति और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।

परंपरा के साथ जरूरी सावधानी

अक्सर नाग पंचमी पर जीवित सांपों को दूध पिलाने की कोशिश की जाती है। जीव विज्ञान के अनुसार, सांप मांसाहारी सरीसृप होते हैं और दूध उनका प्राकृतिक भोजन नहीं है। जबरन दूध पिलाने से उनकी जान को खतरा हो सकता है।

इसलिए जीवित सांपों को पकड़ने या परेशान करने के बजाय नाग देवता की मूर्ति या तस्वीर की पूजा करना ही शास्त्र सम्मत और अहिंसक तरीका है।

नाग पंचमी हमें प्रकृति के हर छोटे-बड़े जीव का आदर करने और उनके संरक्षण का संदेश देती है।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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