Nag Panchami Puja Vidhi : सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नागों के पूजन और शिव आराधना के लिए बेहद खास मानी जाती है।
इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को सावन के सोमवार के साथ पड़ रही है। पंचांग के अनुसार ऐसा संयोग करीब 23 साल बाद बना है, जिससे इस दिन की धार्मिक महत्ता और बढ़ गई है।
नाग पंचमी के मौके पर अक्सर सर्प दोष और कालसर्प दोष की चर्चा सुनने को मिलती है। कई लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि ज्योतिषीय मान्यताओं में इन दोनों की वजह और प्रभाव पूरी तरह अलग बताए गए हैं।
नाग पंचमी 2026: तिथि और शुभ समय
उदया तिथि के नियम के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा।
- पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त, शाम 04:52 बजे से
- पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त, शाम 05:00 बजे तक
- विशेष संयोग: सावन सोमवार व्रत और नाग पंचमी का एक साथ होना
सर्प दोष क्या है और यह क्यों बनता है?
धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सर्प दोष मुख्य रूप से कर्मों से जुड़ा माना जाता है। यदि जाने-अनजाने किसी जीव या नाग को कष्ट पहुंचाया गया हो, अथवा पूर्व जन्म के कुछ ऐसे कर्म रहे हों, तो उसे सर्प दोष का कारण माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस दोष के प्रभाव से परिवार में संतान से जुड़ी चिंताएं, विवाह में देरी, मानसिक तनाव या आर्थिक रुकावटें आ सकती हैं।
कालसर्प दोष क्या होता है?
कालसर्प दोष किसी घटना या कर्म के बजाय जातक की जन्म कुंडली की एक विशेष ग्रहीय बनावट है। जब जन्म कुंडली में सभी सातों मुख्य ग्रह राहु और केतु के एक तरफ आ जाते हैं, तब इसे ज्योतिष में कालसर्प योग या दोष कहा जाता है।
इसके कई प्रकार होते हैं, जैसे अनंत, कुलिक, वासुकी और शंखपाल। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को मेहनत के अनुपात में परिणाम मिलने में देरी या जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
दोनों में मुख्य अंतर क्या है?
कारण का फर्क: सर्प दोष कर्म और आचरण (जैसे किसी जीव को सताना) से जुड़ा माना जाता है, जबकि कालसर्प दोष जन्म के समय ग्रहों (राहु-केतु) की खगोलीय स्थिति से बनता है।
प्रभाव का दायरा: सर्प दोष का असर कई बार कुल या संतान पक्ष पर देखा जाता है, जबकि कालसर्प दोष व्यक्ति के निजी संघर्ष और करियर के उतार-चढ़ाव से संबंधित होता है।
सकारात्मक पहलू: हर कालसर्प योग नुकसानदेह नहीं होता। कई बार सही दिशा में प्रयास करने पर यही योग जातक को मजबूत इच्छाशक्ति और बड़ी सफलता भी दिलाता है।
नाग पंचमी पर पूजे जाते हैं ये 12 नाग देवता
नाग पंचमी की पूजा के दौरान द्वादश (12) प्रमुख नागों के नाम लेने और उनका ध्यान करने की परंपरा है:
- अनंत
- वासुकी
- शेष
- पद्म
- कंबल
- कर्कोटक
- अश्वतर
- धृतराष्ट्र
- शंखपाल
- कालिया
- तक्षक
- पिंगल
इस दिन शिवलिंग पर तांबे या चांदी के लोटे से जलाभिषेक करना, नाग देवता को कच्चा दूध और दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है।











