Nag Panchami Shivling Puja : इस बार सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी का शुभ संयोग बना है। भगवान शिव के गले में नाग देवता का वास होने के कारण यह दिन शिव भक्तों और नाग पंचमी का व्रत रखने वालों के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
इस दिन महादेव और नाग देवता दोनों की एक साथ आराधना करने से परिवार में सुख, शांति और सुरक्षा बनी रहती है।
अगर आप आज पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए पूजा की सरल विधि, शिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली सामग्री और इस दिन की जरूरी सावधानियां।
शिवलिंग पर क्या-क्या अर्पित करें?
महादेव को सादगी प्रिय है। आप अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार नीचे दी गई सामग्रियों से पूजन कर सकते हैं:
शुद्ध जल और गंगाजल: सबसे पहले तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
कच्चा दूध: जल के बाद हल्के भाव से दूध से अभिषेक करें।
बेलपत्र और धतूरा: तीन पत्तों वाला साबुत बेलपत्र (चिकन वाला हिस्सा शिवलिंग की तरफ) और धतूरा चढ़ाएं।
सफेद फूल और अक्षत: बिना टूटे हुए चावल (अक्षत) और सफेद चंदन लगाएं।
मौसमी फल और भोग: कोई भी मीठा फल या पंचामृत अर्पित करें।
घर पर आसान पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। सबसे पहले हाथ में जल लेकर आचमन करें और प्रथम पूज्य भगवान गणेश का ध्यान करें।
इसके बाद शिवलिंग पर पहले शुद्ध जल, फिर कच्चा दूध और अंत में दोबारा जल चढ़ाएं। शिवलिंग पर चंदन लगाएं, अक्षत, सफेद फूल और बेलपत्र अर्पित करें।
धूप और घी का दीपक जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का शांत मन से 108 बार जाप करें। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और आरती उतारकर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।
नाग देवता की पूजा कैसे करें?
नाग पंचमी पर नाग देवता की चांदी, पीतल या मिट्टी की प्रतिमा या चित्र की पूजा करनी चाहिए। नाग देवता को अक्षत, हल्दी, रोली और फूल चढ़ाएं।
धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों नजरिए से जीवित सांपों को दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होता है।
इसलिए जीवित सांप को दूध पिलाने के बजाय नाग देवता की प्रतिमा के समक्ष सांकेतिक रूप से दूध और फल का भोग लगाएं।
नाग पंचमी के दिन क्या सावधानियां बरतें?
इस दिन जमीन की खुदाई, खेत जोतना या किसी भी जीव-जंतु को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
शिवलिंग पर कभी भी तुलसी के पत्ते, सिंदूर या केतकी के फूल न चढ़ाएं।
पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और आडंबर की जगह सच्ची श्रद्धा पर ध्यान दें।

















