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Nag Panchami Shubh Muhurat : नाग पंचमी पर पूजा से पहले न भूलें राहुकाल-भद्रा का समय, जानें कब करें पूजा

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी पर 23 साल बाद सावन के तीसरे सोमवार का खास संयोग बन रहा है। इस दिन पूजा के लिए सुबह 2 घंटे 37 मिनट का सबसे उत्तम समय रहेगा, जिसमें शिव जी और नाग देवता की आराधना से विशेष फल मिलेगा।

Published On: August 16, 2026 10:06 AM
Nag Panchami Shubh Muhurat

Nag Panchami Shubh Muhurat : सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस बार 17 अगस्त 2026 को यह पर्व बेहद खास होने वाला है, क्योंकि पूरे 23 साल बाद नाग पंचमी के दिन ही सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है।

इससे पहले ऐसा दुर्लभ संयोग साल 2003 में देखा गया था। एक ही दिन भोलेनाथ और नाग देवता की आराधना का अवसर मिलने से इस तिथि का आध्यात्मिक महत्व काफी बढ़ गया है।

तिथि और समय का गणित

पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 4 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम 5 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के नियम के तहत नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को ही मनाई जाएगी।

इस दिन शुभ योग, शुक्ल योग, रवि योग के साथ-साथ हंसराज योग का भी निर्माण हो रहा है। इन शुभ मुहूर्तों में की गई पूजा से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष और पितृ दोष से राहत मिलने की मान्यता है।

पूजा के लिए मिलेंगे 2 घंटे 37 मिनट

नाग पंचमी पर पूजा-अर्चना के लिए सबसे श्रेष्ठ समय सुबह के वक्त रहेगा।

  • उत्तम पूजा मुहूर्त: सुबह 5 बजकर 50 मिनट से सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 09 मिनट तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 37 मिनट से दोपहर 3 बजकर 29 मिनट तक
  • रवि योग: सुबह 5 बजकर 52 मिनट से सुबह 8 बजकर 04 मिनट तक

राहुकाल का समय और भद्रा की स्थिति

17 अगस्त को सुबह 7 बजकर 31 मिनट से 9 बजकर 9 मिनट तक राहुकाल रहेगा। सामान्य तौर पर इस दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। हालांकि, ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार राहु-केतु और कालसर्प से जुड़े दोष निवारण के लिए इस समय में मंत्र जाप और शिव आराधना की जा सकती है।

राहत की बात यह है कि इस दिन भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा, जिससे दिनभर के अन्य शुभ कार्यों में कोई रुकावट नहीं आएगी।

पंचमी तिथि और नाग पूजन का संबंध

सनातन परंपरा में प्रत्येक तिथि का संबंध किसी न किसी देव शक्ति से माना गया है। पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता हैं।

भगवान शिव के कंठ में नागराज वासुकी विराजमान हैं और जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर विश्राम करते हैं। यही कारण है कि सावन की पंचमी को नाग पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

सरल पूजा विधि और जरूरी सावधानियां

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, कच्चा दूध और फूल अर्पित कर धूप-दीप दिखाएं।

जीवित सांपों को जबरन दूध पिलाने की बजाय नाग देवता की मिट्टी या धातु की प्रतिमा का पूजन करें।

इस दिन जमीन की खुदाई करने, जुताई करने या किसी भी जीव को अनजाने में भी चोट पहुंचाने से बचें।

मन में शुद्ध भाव रखकर ‘ॐ नमः शिवाय’ और नाग गायत्री मंत्र का जाप करें।

सावन सोमवार और नाग पंचमी के इस मेल पर सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सुख, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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