नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। दफ्तरों में दिन-रात खटने वाले कर्मचारियों के लिए अब छुट्टियों का गणित पूरी तरह बदलने वाला है, क्योंकि नए New Labour Code 2025 (ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड- 2020) ने ‘Earned Leaves’ को लेकर दशकों पुराने नियमों को पलट दिया है।
इस कानून के केंद्र में वह कामकाजी वर्ग है जो अब तक अपनी बची हुई छुट्टियों के पैसे पाने के लिए रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने का इंतजार करता था। अब कर्मचारी अपनी मेहनत की उन छुट्टियों को हर साल के अंत में सीधे नकदी यानी ‘इनकैशमेंट’ में बदल सकेंगे।
180 दिन की सर्विस और छुट्टियों का हक
पुराने फैक्ट्रीज एक्ट 1948 की वह बंदिश अब खत्म हो गई है, जिसमें कर्मचारी को छुट्टियों का हक पाने के लिए कम से कम 240 दिनों तक लगातार काम करना पड़ता था। नए नियमों के मुताबिक, यदि आपने किसी कैलेंडर वर्ष में महज 180 दिन (करीब छह महीने) की सेवा पूरी कर ली है, तो आप वेतन सहित छुट्टियों के कानूनी हकदार बन जाएंगे। यह प्रावधान पूरे भारत में एक समान लागू होगा, हालांकि जिन राज्यों में पहले से ही इससे भी अधिक उदार नियम प्रभावी हैं, वहां के कर्मचारियों को वे बेहतर लाभ मिलते रहेंगे।
मैनेजर ने छुट्टी रोकी तो कर्मचारी का फायदा
अक्सर देखा जाता है कि वर्कलोड का बहाना बनाकर बॉस छुट्टियों की अर्जी खारिज कर देते थे और साल खत्म होते ही वे छुट्टियां ‘लैप्स’ हो जाती थीं। नया कानून इस मनमानी पर लगाम कसता है। अब यदि कंपनी किसी कर्मचारी की छुट्टी की रिक्वेस्ट रिजेक्ट करती है, तो वे छुट्टियां कभी खत्म नहीं होंगी। ऐसी स्थिति में उन छुट्टियों को बिना किसी अधिकतम सीमा (Upper Limit) के अगले साल के खाते में जोड़ दिया जाएगा। यानी कंपनी की मजबूरी अब कर्मचारी के नुकसान का कारण नहीं बनेगी।
हर साल होगी एक्स्ट्रा कमाई
आर्थिक मोर्चे पर यह कोड एक बड़ा रिवॉर्ड लेकर आया है। नियम कहते हैं कि एक कर्मचारी अधिकतम 30 दिनों की छुट्टियों को ही अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड कर सकता है। अगर खाते में इससे ज्यादा छुट्टियां जमा होती हैं, तो कर्मचारी उन अतिरिक्त दिनों के बदले पैसे का दावा कर सकता है। इतना ही नहीं, यह विकल्प भी खुला रखा गया है कि साल के अंत में कर्मचारी अपनी जमा हुई सभी छुट्टियों को इनकैश कराकर अतिरिक्त सैलरी जैसा लाभ ले सकें।
सैलरी और पद की अनिवार्य शर्त
हालांकि, इन नए नियमों का लाभ हर किसी को नहीं मिलेगा। यह कानून विशेष रूप से उन वर्कर्स के लिए है जो मैनुअल, अकुशल, कुशल, तकनीकी या क्लर्कियल भूमिकाओं में हैं और जिनका मासिक वेतन 18,000 रुपये से कम है।
मैनेजरियल, प्रशासनिक या 18,000 रुपये से अधिक वेतन पाने वाले सुपरवाइजर इस विशिष्ट लाभ के दायरे से बाहर रखे गए हैं। साथ ही, यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही संबंधित प्रदेश की कंपनियां इन नियमों को लागू करने के लिए बाध्य होंगी।











