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Productivity Linked Bonus : केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस पर हलचल तेज, दशहरा से पहले खाते में आ सकती है रकम

केंद्रीय कर्मचारियों के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस पर फैसला जल्द संभव है। ₹7,000 की पुरानी गणना सीमा हटाकर ₹21,000 करने की मांग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने दबाव बढ़ा दिया है।

Published On: October 1, 2026 1:41 PM
Productivity Linked Bonus Update

HIGHLIGHTS

  • 20 अक्टूबर को दशहरा होने के चलते पहले हफ्ते में ऐलान की उम्मीद।
  • 7,000 की मासिक सीमा पर अभी मिलता है मात्र ₹6,908 बोनस।
  • मांग मानी गई तो कर्मचारियों के खाते में पहुंचेंगे ₹20,724।
  • चार आयुध कारखानों में 18.56 दिन के भुगतान प्रस्ताव पर भारी रोष।

त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही केंद्र सरकार के दफ्तरों में सालाना बोनस की चर्चा गरमा चुकी है। ग्रुप बी और ग्रुप सी के नॉन-गजटेड कर्मचारियों को दिए जाने वाले प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस यानी पीएलबी (Productivity Linked Bonus) को लेकर कर्मचारी यूनियनों ने वित्त मंत्रालय और कैबिनेट सचिवालय पर दबाव बढ़ा दिया है।

बात सिर्फ इस पर नहीं टिकी है कि पैसा कब क्रेडिट होगा-असली टकराव उस दशक पुरानी गणना सीमा को लेकर है, जो आज की महंगाई के दौर में पूरी तरह बेमानी हो चुकी है।

7,000 की सीलिंग पर फंसा पेच, तीन गुना बढ़ोतरी की मांग

वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार बोनस की गणना के लिए अधिकतम 7,000 रुपये प्रति माह की सीलिंग लागू रखती है। 30.4 दिनों के औसत महीने के फॉर्मूले से हिसाब लगाएं तो एक कर्मचारी के हाथ में महज 6,908 रुपये ही आते हैं। नेशनल काउंसिल फॉर ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र में इस विसंगति को रेखांकित किया है।

उनका तर्क है कि जब केंद्रीय श्रम मंत्रालय के नियमों के अनुसार ही एक अकुशल श्रमिक का न्यूनतम वैधानिक वेतन लगभग 21,000 रुपये तय है, तब केंद्र अपने ही नियमित कर्मचारियों का बोनस 7,000 रुपये के कल्पित वेतन पर कैसे आंक सकता है? अगर इस सीलिंग को संशोधित कर 21,000 रुपये किया जाता है, तो कर्मियों को लगभग 20,724 रुपये मिलेंगे।

दशहरे से पहले भुगतान की समयसीमा, डाक विभाग पर दबाव

डाक विभाग की संयुक्त परिषद ने 25 सितंबर को सीधे सचिव को प्रतिवेदन सौंपकर 21 अक्टूबर को शुरू हो रहे दुर्गा पूजा उत्सव से पहले भुगतान पूरा करने की अपील की है। चूंकि इस साल 20 अक्टूबर को दशहरा पड़ रहा है, इसलिए परंपरा के मुताबिक अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ही फाइल क्लीयर होनी जरूरी है।

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और भारत पेंशनर्स समाज के पदाधिकारियों का आकलन है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल अक्टूबर के पहले सप्ताह में फाइल को मंजूरी दे सकता है। रेलवे और डाक जैसे बड़े महकमों में त्योहारी अग्रिम की प्रक्रिया अमूमन हफ्ते भर का समय लेती है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर समय काफी कम बचा है।

आयुध निर्माणियों में कटौती पर उग्र विरोध

एक तरफ जहां सामान्य कर्मचारी सीलिंग बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं रक्षा उत्पादन से जुड़ी इकाइयों में असंतोष भड़क गया है। एआईडीईएफ ने 30 सितंबर को व्यापक विरोध का आह्वान किया। विवाद की जड़ रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले चार प्रमुख आयुध कारखानों—कानपुर, शाहजहांपुर, तमिलनाडु के अवादी और हजरतपुर-के कर्मचारियों का बोनस घटाना है। इन संयंत्रों में कर्मियों को तय 30 दिनों के स्थान पर मात्र 18.56 दिन के अनुपात में बोनस देने का प्रस्ताव रखा गया है।

यूनियनों का साफ कहना है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण के बाद कर्मचारियों के सेवा लाभों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। मांग सीधे तौर पर यही है कि इन चारों कारखानों के श्रमिकों को भी पूरे 30 दिन की पात्रता और 21,000 रुपये की नई गणना सीमा का पूरा लाभ मिलना चाहिए।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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