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Hindu Vivah Sanskar : हिंदू विवाह में 7 फेरे क्यों होते हैं, जानिए परंपरा के पीछे छिपा गहरा अर्थ

Hindu Vivah Sanskar : हिंदू धर्म में सप्तपदी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि विवाह की पूर्णता और वैधता का सबसे बड़ा प्रमाण है। अग्नि को साक्षी मानकर लिए गए सात फेरे और सात वचन वर-वधू को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर सात जन्मों के लिए एक अटूट बंधन में बांधते हैं।

Published on: January 19, 2026 6:06 AM
Hindu Vivah Sanskar
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HIGHLIGHTS

  • शास्त्रों के अनुसार सप्तपदी (सात फेरे) के बिना हिंदू विवाह को अपूर्ण माना जाता है।
  • सात की संख्या ब्रह्मांडीय पूर्णता (सात सुर, सात ग्रह, सात रंग) का प्रतीक है।
  • ऋग्वेद में अग्नि के फेरों को विवाह की सामाजिक और धार्मिक वैधता का आधार बताया गया है।
  • सप्तपदी में वर-वधू जीवन के हर सुख-दुख में एक-दूसरे का पूरक बनने का संकल्प लेते हैं।

 

Hindu Vivah Sanskar : हिंदू संस्कृति में विवाह को महज एक सामाजिक समझौता नहीं, बल्कि संस्कारों में सबसे पवित्र बंधन माना गया है। इस बंधन की नींव ‘सप्तपदी’ यानी सात फेरों पर टिकी है।

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक अग्नि के साक्षी में वर-वधू सात फेरे नहीं ले लेते, तब तक विवाह पूर्ण नहीं होता। यह रस्म दो व्यक्तियों को आत्मिक रूप से एक करती है।

क्यों खास है 7 का अंक?

सात फेरों की परंपरा के पीछे गहरा दार्शनिक अर्थ है। भारतीय संस्कृति में 7 की संख्या को सात्विक और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। जिस तरह संगीत में सात सुर, इंद्रधनुष में सात रंग, ब्रह्मांड में सात ग्रह और सात लोक होते हैं, उसी तरह विवाह में सात फेरे दो आत्माओं के मिलन को पूर्ण करते हैं।

यह रस्म वर-वधू को केवल इस जन्म के लिए नहीं, बल्कि सात जन्मों के लिए एक-दूसरे का जीवनसाथी बनाती है। इससे वैवाहिक जीवन की नींव मजबूत होती है।

रस्म और वचनों की मर्यादा

सप्तपदी की प्रक्रिया पवित्र अग्नि के चारों ओर परिक्रमा कर पूरी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इसमें पहला फेरा दुल्हन आगे रहकर लेती है, जबकि शेष छह फेरों में दूल्हा आगे चलता है। हर फेरे के साथ पंडित वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हैं और वर-वधू एक-एक वचन लेते हैं।

फेरे लेते समय दुल्हन अपने दाहिने पैर से सुपारी और हल्दी जैसे सात मांगलिक पदार्थों को स्पर्श करते हुए आगे बढ़ती है। ये सात वचन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर साथ चलने का संकल्प हैं।

अंतिम फेरे के बाद दूल्हा, दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है, जिसके साथ ही विवाह संस्कार संपन्न होता है। अग्नि को शुद्धता और सत्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी गवाही अमिट होती है।

वैदिक और भावनात्मक जुड़ाव

ऋग्वेद और अन्य प्राचीन धर्मग्रंथों में सप्तपदी को ही विवाह की वैधता का असली प्रमाण माना गया है। यह रस्म केवल धार्मिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि भावनात्मक गहराई भी रखती है।

अग्नि को साक्षी मानकर लिए गए ये वचन रिश्ते में विश्वास, प्रेम और सम्मान की भावना भरते हैं। यह रस्म परिवार और समाज के सामने प्रतिबद्धता जाहिर करती है और दंपती को जीवन के हर सुख-दुख में साथ रहने की प्रेरणा देती है।

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Ganga

गंगा एक अनुभवी धार्मिक समाचार लेखिका हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 3 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव प्राप्त है। धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है। वे सटीक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। गंगा का उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक घटनाओं, परंपराओं और समसामयिक समाचारों को सरल और विश्वसनीय रूप में पहुँचाना है।

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