Tulsi Vastu Tips : हिंदू मान्यताओं में तुलसी का पौधा केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप है। हर घर के आंगन में तुलसी का होना सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
हालांकि, वास्तु शास्त्र स्पष्ट करता है कि तुलसी को सही दिशा में लगाने के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि उसके आसपास कौन से पौधे रखे हैं। गलत संगति तुलसी की पवित्रता और घर की ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है।
कांटेदार और दूधिया पौधों से बनाएं दूरी
वास्तु के नियमों के मुताबिक, तुलसी के गमले या क्यारी के पास कभी भी कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस या गुलाब) नहीं लगाने चाहिए। मान्यता है कि कांटे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं, जिससे घर की शांति भंग हो सकती है और कलह का वातावरण बनता है।
इसी तरह, जिन पौधों को तोड़ने पर दूध जैसा सफेद तरल (Latex) निकलता है, उन्हें भी तुलसी से दूर रखना चाहिए।
ऐसे पौधे न केवल वास्तु दोष पैदा करते हैं, बल्कि इनका प्रभाव परिवार के सदस्यों की सेहत पर भी विपरीत पड़ सकता है।
बड़े पेड़ों की छाया से बचें
तुलसी को हमेशा खुली हवा और पर्याप्त धूप की जरूरत होती है। इसलिए, इसके पास बरगद, पीपल या कोई भी विशाल और घना वृक्ष नहीं लगाना चाहिए।
अगर इन बड़े पेड़ों की छाया तुलसी पर पड़ती है, तो इसे अशुभ माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें तो छाया के कारण तुलसी का पौधा ठीक से पनप नहीं पाता।
कड़वे और अधिक पानी वाले पौधे
वास्तु शास्त्र नीम और करेला जैसे कड़वे फल या पत्ते वाले पौधों को तुलसी के निकट लगाने की मनाही करता है। माना जाता है कि इनकी कड़वाहट तुलसी की सकारात्मक ऊर्जा को क्षति पहुंचाती है।
इसके अलावा, तुलसी को बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। अतः ऐसे पौधे पास में न लगाएं जो ज्यादा पानी मांगते हैं। अधिक नमी तुलसी की जड़ों को सड़ा सकती है, जिससे पौधा नष्ट हो सकता है।
ध्यान रखें कि तुलसी के पास कभी भी सूखा या मुरझाया हुआ पौधा न छोड़ें, यह सीधे तौर पर घर में नकारात्मकता और वास्तु दोष को बुलावा देता है।



















