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Gau Daan Ke Fayde : आख़िर मृत्यु से पहले गौ दान क्यों किया जाता है, जानिए धार्मिक कारण और मान्यताएँ

Gau Daan Ke Fayde : हिंदू धर्म शास्त्रों में 'गौ दान' को महादान की श्रेणी में रखा गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जीवन के अंतिम समय में या मृत्यु पूर्व किया गया गाय का दान आत्मा को यमलोक की कठिन यात्रा और वैतरणी नदी पार करने में सहायता करता है। सही विधि और संकल्प के साथ किया गया यह दान पितृ दोष समाप्त कर परिवार में सुख-समृद्धि लाता है।

Published on: January 20, 2026 5:59 AM
Gau Daan Ke Fayde
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HIGHLIGHTS

  • गरुड़ पुराण में गौ दान को मोक्ष प्राप्ति और यमराज के दंड से मुक्ति का उपाय बताया गया है।
  • मान्यता है कि गौ दान करने वाली आत्मा गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी आसानी से पार कर लेती है।
  • गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है, जिससे यह दान कई यज्ञों के बराबर पुण्य देता है।
  • शास्त्रों के अनुसार केवल स्वस्थ और दूध देने वाली गाय का दान ही मान्य है, बूढ़ी या बीमार गाय का नहीं।

Gau Daan Ke Fayde : हिंदू धर्म शास्त्रों में ‘गौ दान’ को महादान का दर्जा प्राप्त है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में इस बात का स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर या मृत्यु की आशंका होने पर गाय का दान करना आत्मा के लिए परलोक की राह को आसान बना देता है।

सदियों से चली आ रही इस परंपरा का सीधा संबंध मोक्ष प्राप्ति और यमराज के दंड से मुक्ति से जुड़ा है।

यमलोक की यात्रा और वैतरणी नदी

गरुड़ पुराण की मान्यताओं के मुताबिक, शरीर त्यागने के बाद आत्मा को यमलोक की कठिन यात्रा तय करनी पड़ती है। इस रास्ते में ‘वैतरणी’ नाम की एक भयानक नदी पड़ती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में या मृत्यु से पूर्व गौ दान किया होता है, उसे इस नदी को पार करने में कष्ट नहीं उठाना पड़ता।

मान्यता है कि दान की गई गाय वहां उपस्थित रहती है और आत्मा उसकी पूंछ पकड़कर आसानी से उस पार उतर जाती है। इसके विपरीत, गौ दान न करने वाली आत्मा को भटकना पड़ता है और उसकी यमलोक यात्रा अत्यंत कष्टदायी हो जाती है।

33 कोटि देवताओं का आशीर्वाद और पितृ दोष से मुक्ति

गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता का स्वरूप माना गया है। इसमें 33 कोटि (प्रकार) देवी-देवताओं का वास होता है।

जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से गौ दान करता है, तो ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य और इंद्र समेत सभी देवता प्रसन्न होते हैं। यह एक अकेला दान कई बड़े यज्ञों के बराबर पुण्य प्रदान करता है।

इसका प्रभाव केवल आत्मा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दान करने वाले के परिवार से ‘पितृ दोष’ भी समाप्त हो जाता है। घर में सुख-समृद्धि आती है और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शास्त्र सम्मत विधि: कैसी गाय का करें दान?

दान का फल तभी मिलता है जब वह सही विधि और पवित्र भावना से किया जाए। गरुड़ पुराण में इसके लिए स्पष्ट नियम बताए गए हैं।

दान के लिए हमेशा स्वस्थ और दूध देने वाली गाय का ही चयन करना चाहिए। बूढ़ी या बीमार गाय का दान शास्त्रों में वर्जित माना गया है।

गाय को भली-भांति सजाकर, सिंदूर लगाकर और वस्त्र ओढ़ाकर ही दान करना चाहिए। गाय के साथ ब्राह्मण को स्वर्ण, वस्त्र, अन्न और उचित दक्षिणा देना भी आवश्यक है।

दान करते समय हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि यह दान अमुक आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किया जा रहा है। गोपाष्टमी या किसी शुभ मुहूर्त में बिना किसी लोभ के किया गया दान ही अक्षय पुण्य देता है।

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Ganga

गंगा एक अनुभवी धार्मिक समाचार लेखिका हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 3 वर्षों से अधिक का लेखन अनुभव प्राप्त है। धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है। वे सटीक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन शैली के लिए जानी जाती हैं। गंगा का उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक घटनाओं, परंपराओं और समसामयिक समाचारों को सरल और विश्वसनीय रूप में पहुँचाना है।

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