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पंजाब में ‘सेहत कार्ड’ पर रार, गरीब परिवार से मांगे पैसे तो अस्पताल पहुंचे AAP नेता

अमृतसर के मकबूलपुरा स्थित पल्स अस्पताल में मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना के तहत 10 लाख रुपये वाले कार्ड पर इलाज से मना करने के बाद भारी हंगामा हुआ। स्थानीय विधायक जीवनजोत कौर और आप नेताओं के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया है।

पंजाब में 'सेहत कार्ड' पर रार, गरीब परिवार से मांगे पैसे तो अस्पताल पहुंचे AAP नेता

HIGHLIGHTS

  • 10 लाख वाले मुख्यमंत्री हेल्थ कार्ड के बावजूद अस्पताल ने पीड़ित परिवार से 3500 रुपये फीस और अन्य खर्चों की मांग की।
  • विधायक जीवनजोत कौर और पार्षद कमल कुमार ने अस्पताल पहुंचकर प्रशासन के साथ तीखी बहस की और गरीबों के शोषण पर नाराजगी जताई।
  • अस्पताल का तर्क है कि संबंधित बीमारी सरकारी स्कीम के तहत कवर नहीं थी, जिसके कारण 'मिसकम्युनिकेशन' हुआ।

अमृतसर, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। पंजाब सरकार की फ्लैगशिप ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के दावों की जमीनी हकीकत पर शनिवार को उस वक्त सवालिया निशान लग गए, जब अमृतसर के मकबूलपुरा स्थित पल्स अस्पताल में एक मासूम के इलाज को लेकर जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ।

सरकार ने हर पंजाबी को 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का वादा कर हेल्थ कार्ड बांटे हैं, लेकिन इस पीड़ित परिवार के लिए यह कार्ड महज एक प्लास्टिक का टुकड़ा साबित हुआ।

मकबूलपुरा के रहने वाले एक गरीब परिवार ने अपने बीमार बच्चे की जान बचाने की उम्मीद में अस्पताल के दरवाजे खटखटाए थे। उनके पास सरकार द्वारा जारी 10 लाख का हेल्थ कार्ड था, जिसे देखकर अस्पताल प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल ने कैशलेस इलाज के बजाय तुरंत 3500 रुपये की फीस और अन्य दवाओं के खर्चों की मांग शुरू कर दी। सालों से अलग-अलग अस्पतालों में धक्के खा रहे इस परिवार के पास फूटी कौड़ी नहीं बची थी, जिसके बाद अस्पताल में तनाव पसर गया।

हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद कमल कुमार और ‘आप’ के अन्य नेता मौके पर पहुंच गए। अस्पताल के दफ्तर में ही नेताओं और एडमिनिस्ट्रेशन के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

नेताओं का कहना था कि कुछ निजी अस्पताल जानबूझकर सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं और गरीबों का शोषण कर रहे हैं, जिससे मुख्यमंत्री भगवंत मान की छवि खराब हो रही है।

मामले के बिगड़ने की खबर मिलते ही अमृतसर पूर्वी से विधायक जीवनजोत कौर खुद अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने पूरे मामले की पड़ताल की और अस्पताल प्रबंधन को दो-टूक कहा कि अगर अस्पताल में संबंधित बीमारी का इलाज संभव नहीं है, तो परिजनों को प्रेमपूर्वक सही दिशा दिखाई जाए, न कि उनसे पैसों की मांग कर परेशान किया जाए। विधायक ने भरोसा दिलाया कि सरकार हर हाल में बच्चे का इलाज सुनिश्चित करेगी।

पंजाब की नई ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (MMSY) देश की पहली ऐसी स्कीम है जो बिना किसी आय सीमा के ₹10 लाख का कवर देती है। हालांकि, बैकग्राउंड सर्च से पता चलता है कि कई निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान बीमा कंपनियों के पास लंबित है, जिसके कारण वे इलाज में आनाकानी कर रहे हैं। वहीं, पल्स अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने सफाई दी कि मरीज की बीमारी इस विशेष स्कीम के दायरे में नहीं आ रही थी, जिससे गलतफहमी पैदा हुई।

फिलहाल, काफी जद्दोजहद के बाद अस्पताल ने परामर्श के जरिए मामला सुलझाया और मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया है। सरकार अब उन अस्पतालों की सूची दोबारा खंगाल रही है जो कार्ड होने के बावजूद मरीजों को लौटा रहे हैं।

Prabhjot Singh

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