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उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का फूटा गुस्सा! 10% क्षैतिज आरक्षण के लिए 21वें दिन भी जारी रहा क्रमिक अनशन

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी और उनके आश्रित 10% क्षैतिज आरक्षण के तहत सरकारी नौकरी की मांग को लेकर 21 दिन से धरने पर हैं। खटीमा और उत्तरकाशी से पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने शासन पर 13 साल से नियुक्ति लटकाने का सीधा आरोप लगाया है।

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का फूटा गुस्सा! 10% क्षैतिज आरक्षण के लिए 21वें दिन भी जारी रहा क्रमिक अनशन

HIGHLIGHTS

  • शहीद स्मारक पर क्रमिक अनशन 21वें दिन जारी रहा।
  • खटीमा और उत्तरकाशी के आश्रित आज अनशन पर बैठे।
  • 10% क्षैतिज आरक्षण लागू होने के बाद भी नियुक्ति नहीं।
  • उम्र बीतने के कारण आश्रितों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

देहरादून, 5 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

शहीद स्मारक पर पिछले तीन हफ्तों से चल रहा सरकारी नौकरी का धरना अब सीधे तौर पर शासन की अनदेखी की कहानी बयां कर रहा है। खटीमा और उत्तरकाशी से देहरादून पहुंचे राज्य आंदोलनकारी आश्रितों ने आज क्रमिक अनशन की कमान अपने हाथ में ली। 21वें दिन भूख हड़ताल पर बैठने वालों में खटीमा के बलवंत सिंह भाटिया और होशियार सिंह ज्याला के साथ उत्तरकाशी से आई शकुंतला रावत शामिल रहीं।

सरकारी नौकरी में 10% क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान हुए पूरे दो साल बीत चुके हैं। फाइलें सचिवालय के अलग-अलग विभागों में धूल फांक रही हैं और चयनित आश्रितों को अब तक एक भी नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के बैनर तले चल रहे इस धरने में आज सीमांत क्षेत्रों से पहुंचे लोगों का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला।

खटीमा से देहरादून पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए सरकारी तंत्र पर तीखा प्रहार किया। पिछले 13 सालों से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे इन आश्रितों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है। शासन और प्रशासन की लेटलतीफी के कारण अधिकतर अभ्यर्थियों की नौकरी की उम्र सीमा खत्म होने की कगार पर आ गई है। सेवा के लिए बचे चंद वर्षों का तर्क देते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द इस पूरे मामले का पटाक्षेप करने की मांग रखी।

संयुक्त मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने इस पूरी मुहिम को एक नई दिशा मिलने की बात कही। खटीमा से आए जत्थे की मौजूदगी ने राजधानी में चल रहे इस क्रमिक अनशन में भारी ऊर्जा भर दी है। प्रदेश के हर जिले से अपनी नियुक्ति की बाट जोह रहे राज्य आंदोलनकारी और उनके आश्रित अब एक सिंगल प्लेटफार्म पर खड़े होकर आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं।

धरना स्थल पर दिनभर भारी जमावड़ा लगा रहा और तमाम संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राज्य आंदोलनकारी मंच के सलाहकार केशव उनियाल और जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने अनशनकारियों का हौसला बढ़ाया। राम लाल, खटीमा से भूपेंद्र सिंह ज्याला और दीवान सिंह धामी पूरे समय टेंट में डटे रहे।

विकास नगर क्षेत्र से राम किशन और चमन सिंह ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद की। ऋषिकेश से शैलेश सेमवाल और उत्तरकाशी से शिव सिंह रावत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताया। चिन्हित आंदोलनकारी संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल और मसूरी से पहुंचे बिल्लू बाल्मिकी ने नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का दबाव बनाया।

क्रांति अभिषेक, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष विनोद असवाल और नेताजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभात डंडरियाल भी धरना स्थल पर मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में 10% क्षैतिज आरक्षण को सिर्फ कागजी घोषणा तक सीमित रखने पर कड़ा विरोध दर्ज किया।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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