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ऊंट के आंसुओं का चमत्कार, एक बूंद में खत्म हो सकता है 26 जहरीले सांपों का अस

बीकानेर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC) की ताजा रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ऊंट के आंसुओं में मौजूद नैनोबॉडीज 26 अलग-अलग प्रजातियों के सांपों के घातक जहर को निष्क्रिय कर सकती हैं। यह खोज न केवल मेडिकल जगत में क्रांति लाएगी, बल्कि इससे सर्पदंश से होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।

Camel Tears Benefits

HIGHLIGHTS

  • ऊंट के आंसुओं में पाई जाने वाली विशेष एंटीबॉडीज (नैनोबॉडीज) सांप के जहर को बेअसर करने में सक्षम हैं।
  • बीकानेर के NRCC ने सॉ-स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled Viper) के जहर पर इसका सफल परीक्षण किया है।
  • ऊंट आधारित एंटीवेनम घोड़ों से बनने वाली दवा के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और गर्मी में भी स्थिर रहता है।

Camel Tears Benefits : रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट अब इंसानों के लिए ‘जीवनरक्षक’ साबित होने जा रहे हैं। राजस्थान के बीकानेर स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल (NRCC) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चौंकाने वाली स्टडी पेश की है, जो दुनिया भर में स्नेक-बाइट के इलाज की पूरी तस्वीर बदल सकती है।

शोध के अनुसार, ऊंट के आंसुओं में ऐसी अद्भुत एंटीबॉडीज मिली हैं, जो किंग कोबरा, कॉमन करैत और रसेल वाइपर जैसे 26 जानलेवा सांपों के जहर को चंद सेकंडों में बेअसर कर सकती हैं।

NRCC के वैज्ञानिकों ने अपनी लैब में ऊंटों को ‘सॉ-स्केल्ड वाइपर’ (Saw-scaled Viper) के जहर के खिलाफ प्रतिरक्षित (Immunize) किया। इस प्रक्रिया के दौरान पाया गया कि ऊंट के आंसुओं और उनके खून में विशेष प्रकार की नैनोबॉडीज विकसित हो रही हैं।

ये नैनोबॉडीज आकार में बेहद छोटी और बेहद शक्तिशाली होती हैं, जो सांप के जहर में मौजूद घातक टॉक्सिन्स को जकड़कर उन्हें खत्म कर देती हैं। यही वजह है कि अब ऊंट के आंसुओं की वैश्विक बाजार में कीमत किसी भी अन्य कीमती तरल से कहीं ज्यादा होने वाली है।

घोड़ों के मुकाबले 4 गुना ज्यादा असरदार

वर्तमान में सांप के जहर की काट यानी एंटीवेनम बनाने के लिए घोड़ों (Horses) का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ऊंट के आंसुओं से तैयार होने वाला यह नया एंटीडोट पारंपरिक दवाओं से कहीं बेहतर है।

रिसर्च के आंकड़ों की मानें तो ऊंट की एंटीबॉडीज घोड़ों के मुकाबले लगभग 4 गुना ज्यादा मारक क्षमता रखती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि घोड़ों से बनी दवा से कई बार मरीजों को गंभीर एलर्जी हो जाती है, लेकिन ऊंट के आंसुओं से बना यह सीरम पूरी तरह सुरक्षित माना जा रहा है।

गर्मी में भी नहीं होगी दवा खराब

भारत जैसे गर्म देश के लिए यह खोज किसी वरदान से कम नहीं है। लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन और दुबई की सेंट्रल वेटरनरी रिसर्च लेबोरेटरी के पुराने शोधों के साथ जब NRCC की इस नई स्टडी को जोड़ा गया, तो एक बड़ा सच सामने आया।

ऊंट की ये नैनोबॉडीज ‘हीट-स्टेबल’ होती हैं। यानी जहां घोड़ों से बनी एंटीवेनम दवा को फ्रिज में रखना अनिवार्य होता है, वहीं ऊंट के आंसुओं से बनी दवा को बिना रेफ्रिजरेशन के भी ऊंचे तापमान पर सुरक्षित रखा जा सकेगा।

बढ़ सकती है ऊंटों की मांग और कीमत

इस रिसर्च के सफल होने के बाद अब ऊंटों को पालने वाले पशुपालकों की किस्मत चमकने की उम्मीद है। फार्मास्युटिकल कंपनियां अब बड़े पैमाने पर ऊंटों के आंसुओं और उनके सीरम को खरीदने के लिए दिलचस्पी दिखा रही हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक उन इलाकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी जहां हर साल हजारों लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। अब ऊंट सिर्फ माल ढोने वाला जानवर नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली ‘फार्मा फैक्ट्री’ के रूप में पहचाना जाएगा।

Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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