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सावन में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जानिए किन बातों का रखें ध्यान

सावन के महीने में भक्ति के साथ-साथ सही आहार चुनना सेहत और आस्था दोनों के लिहाज से बेहद जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और विज्ञान, दोनों ही इस दौरान साग और दूध जैसी चीजों से दूरी बनाने की सलाह देते हैं।

Published On: August 1, 2026 11:54 AM
Sawan Rules

Sawan Rules : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ शरीर को सेहतमंद रखने का भी समय होता है। बारिश के मौसम में हमारे शरीर की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए इस दौरान खान-पान में खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों या ज्योतिषियों से सुना होगा कि सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां और दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

इस नियम के पीछे न केवल धार्मिक मान्यताएं छिपी हैं, बल्कि इसके कई ठोस वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हैं।

साग और हरी सब्जियों से परहेज क्यों?

शास्त्रों में सावन के दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया गया है। वहीं, अगर वैज्ञानिक नजरिए से देखें, तो मानसून के मौसम में हरी सब्जियों पर कीड़े-मकोड़े और सूक्ष्म बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।

कीड़े-मकोड़ों का खतरा: बारिश में हरी पत्तेदार सब्जियों (जैसे पालक, मेथी या सरसों का साग) में बारीक कीड़े छिप जाते हैं, जिन्हें धोना काफी कठिन होता है। इनके पेट में जाने से संक्रमण का डर रहता है।

पाचन क्रिया पर असर: बारिश के दिनों में हमारा डाइजेशन सुस्त पड़ जाता है। साग में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिसे पचाने के लिए पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

कमजोर पाचन के कारण गैस, एसिडिटी और पेट दर्द की समस्या हो सकती है।

सावन में दूध पीने से क्यों मना किया जाता है?

धार्मिक दृष्टिकोण से सावन में शिवजी का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया जाता है, इसलिए इस महीने सात्विक आहार के तहत दूध के सेवन को सीमित रखने की बात कही जाती है।

वैज्ञानिक आधार पर देखा जाए तो इस मौसम में मवेशी (गाय और भैंस) बाहर उगी घास चरते हैं। बारिश के कारण घास पर भी कीट और जीवाणु मौजूद होते हैं।

जब मवेशी इस घास को खाते हैं, तो इसका असर दूध की गुणवत्ता पर पड़ सकता है, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।

सावन के दौरान आहार संबंधी जरूरी सावधानियां

सावन के पूरे महीने में निरोग रहने के लिए अपने खान-पान में कुछ आसान बदलाव किए जा सकते हैं:

ताजा और सुपाच्य भोजन चुनें: भोजन में ऐसी चीजें शामिल करें जो जल्दी पच सकें, जैसे लौकी, तोरई, कद्दू, और मूंग दाल।

सब्जियों की अच्छी तरह सफाई करें: किसी भी सब्जी को पकाने से पहले गुनगुने पानी और नमक से अच्छी तरह साफ करें।

पर्याप्त पानी पीएं: मानसून में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को डिटॉक्स रखने के लिए उबला या साफ पानी नियमित पीते रहें।

बासी और भारी खाने से बचें: तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार और बासी खाना इस मौसम में पेट की परेशानी बढ़ा सकता है।

सावन के महीने में सही परहेज अपनाकर आप न केवल धार्मिक परंपराओं का सम्मान कर सकते हैं, बल्कि मानसून में होने वाले कई तरह के पेट के संक्रमण से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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