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जुलाई 2026 में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, हुआ ₹29.88 लाख करोड़ का लेनदेन

भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से फैल रहा है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने जुलाई 2026 में लेनदेन का नया इतिहास रच दिया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने के दौरान कुल 23.66 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।

Published On: August 3, 2026 5:32 PM
जुलाई 2026 में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, हुआ ₹29.88 लाख करोड़ का लेनदेन

HIGHLIGHTS

  • जुलाई 2026 में ₹29.88 लाख करोड़ का लेनदेन दर्ज हुआ।
  • एक महीने में 23.66 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरे हुए।
  • मई और जून 2026 के पुराने आंकड़े पीछे छूटे।
  • वैश्विक स्तर पर 10 देशों तक यूपीआई सेवा पहुंची।

UPI : देश भर में कैशलेस अर्थव्यवस्था की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। जुलाई 2026 के महीने में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) नेटवर्क ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक लेनदेन का आंकड़ा हासिल कर लिया है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए कुल 23.66 अरब ट्रांजैक्शन संपन्न हुए। इन संपूर्ण सौदों का कुल मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा भारतीय डिजिटल बैंकिंग इतिहास में किसी भी एक महीने का सर्वोच्च स्तर है।

चालू वर्ष 2026 की शुरुआत से ही डिजिटल भुगतानों में मासिक स्तर पर उतार-चढ़ाव और बढ़त देखी जा रही थी। जुलाई से ठीक पहले मई 2026 में यूपीआई ने 23.20 अरब ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड बनाया था।

जून 2026 के दौरान लेनदेन की कुल संख्या थोड़ी गिरकर 22.72 अरब रह गई थी। जुलाई आते-आते मई का पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह से ध्वस्त हो गया और लेनदेन संख्या में अचानक बड़ा उछाल आया।

सालाना आधार पर तुलना करने पर यह बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। एक साल पहले जुलाई 2025 में यूपीआई के माध्यम से ₹25.08 लाख करोड़ का कुल लेनदेन दर्ज किया गया था।

जुलाई 2026 में ₹29.88 लाख करोड़ का स्तर छूने से यह सिद्ध होता है कि सालाना आधार पर डिजिटल पेमेंट्स की कुल राशि में भारी बढ़ोतरी हुई है। यह वित्तीय व्यवहार में नोटों के स्थान पर डिजिटल माध्यमों की स्थाई स्वीकार्यता को दर्शाता है।

स्थानीय बाजार स्तर पर छोटे स्ट्रीट वेंडरों से लेकर विशाल सुपरमार्केट चेन तक हर वर्ग में यूपीआई क्यूआर कोड की पहुंच स्थापित हो चुकी है। दैनिक किराने की खरीदारी, ऑनलाइन ई-कॉमर्स ऑर्डर, होटल बिल, टैक्सी किराया भुगतान और उपयोगिता बिलों का भुगतान पूरी तरह यूपीआई पर स्थानांतरित हो चुका है।

स्मार्टफोन पर सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में सीधे बैंक खातों में धन ट्रांसफर करने की प्रक्रिया ने पारंपरिक बैंकिंग की कागजी जटिलताओं को समाप्त कर दिया है। इसी त्वरित प्रक्रिया के कारण दैनिक उपयोगकर्ताओं की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज हो रही है।

वैश्विक मोर्चे पर भारत की इस स्वदेशी पेमेंट प्रणाली का विस्तार तेजी से जारी है। यूपीआई का दायरा अब केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित कुल 10 देशों में यूपीआई नेटवर्क का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है। विदेशों में यात्रा कर रहे भारतीय पर्यटकों और वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों के लिए सीधे भारतीय बैंक खातों से पैसे भेजना और भुगतानों का निपटारा करना पहले से काफी आसान हो चुका है।

वित्तीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2026 में प्राप्त यह आंकड़े इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि भारतीय आबादी का बड़ा हिस्सा बैंकिंग प्रणाली के डिजिटलीकरण को पूरी तरह अपना चुका है।

23.66 अरब की विशाल ट्रांजैक्शन संख्या यह दर्शाती है कि आम जनता की दैनिक वित्तीय निर्भरता अब नकद राशि के बजाय सीधे यूपीआई सर्वर और मोबाइल वॉलेट पर टिक गई है। आने वाले त्योहारों के सीजन में इस आंकड़े में और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।

पेमेंट इकोसिस्टम का संचालन करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) देश के रिटेल पेमेंट बुनियादी ढांचे की रीढ़ है। इस संस्था की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के संयुक्त प्रयासों से की गई थी।

एनपीसीआई द्वारा विकसित यूपीआई प्रणाली किसी भी दो अलग-अलग बैंकों के खातों के बीच बिना किसी लंबे इंतजार के और सुरक्षित तरीके से तुरंत फंड ट्रांसफर करने का अवसर प्रदान करती है। यही ढांचा आज देश की पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन चुका है।

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Amit Gawri

अमित गावरी 'दून हॉराइज़न' में राष्ट्रीय समाचार लेखक के रूप में देश भर की ब्रेकिंग न्यूज़ और महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं। चुनाव, सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उनकी खास विशेषज्ञता है। अमित हमेशा तथ्यों की गहराई में जाकर रिपोर्टिंग करते हैं, ताकि पाठकों को किसी भी खबर का हर पहलू स्पष्ट रूप से समझ आ सके। क्लिकबेट से दूर रहकर, वे अपनी खबरों में सटीकता और विश्वसनीयता (Trust) बनाए रखते हैं। उनका जर्नलिस्टिक अप्रोच हमेशा जनसरोकार और सटीक सूचना देने पर ही केंद्रित रहता है।

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