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दुबई में घर खरीदने पर मिल रही चमचमाती लग्जरी कार मुफ्त, प्रॉपर्टी बाजार में मची भारी खलबली

ईरान और क्षेत्रीय युद्ध के बढ़ते तनाव ने दुबई के चमकते रियल एस्टेट बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, जहां अब खरीदारों को खींचने के लिए बिल्डर्स मुफ्त लग्जरी कारें और भारी कैश डिस्काउंट जैसे ऑफर दे रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 6 से 9 महीनों में सेकेंडरी मार्केट की कीमतों में 18% तक की बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

दुबई में घर खरीदने पर मिल रही चमचमाती लग्जरी कार मुफ्त, प्रॉपर्टी बाजार में मची भारी खलबली

HIGHLIGHTS

  • एंट्री-लेवल प्रॉपर्टी (10-25 लाख दिरहम) की मांग में एक साल के भीतर 40% की भारी गिरावट दर्ज।
  • खरीदारों को लुभाने के लिए डामैक (DAMAC) और अजीजी जैसे दिग्गज डेवलपर्स दे रहे हैं फ्री निसान कारें और लचीले पेमेंट प्लान।
  • मार्च में वास्तविक बिक्री में 50% की कमी, विशेषज्ञ अगले 2 साल तक बाजार में स्थिरता और करेक्शन की जता रहे उम्मीद।

दुबई, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के हालात और भू-राजनीतिक अस्थिरता ने दुबई की उन गगनचुंबी इमारतों की चमक फीकी करना शुरू कर दिया है, जो कल तक निवेशकों की पहली पसंद थीं।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब यहां के प्रॉपर्टी बाजार पर दिख रहा है, जहां पिछले कुछ सालों से जारी ‘बुल रन’ अब सुस्ती के दौर में तब्दील हो गया है। हालात इस कदर चुनौतीपूर्ण हो चुके हैं कि जो बिल्डर्स कल तक प्रीमियम वसूल रहे थे, वे अब ग्राहकों की मिन्नतें करने पर मजबूर हैं।

बाजार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दुबई के एंट्री-लेवल सेगमेंट, जिसमें 10 लाख से 25 लाख दिरहम (AED) की कीमत वाले घर आते हैं, वहां मांग में 40% की जबरदस्त गिरावट आई है।

यह वही सेगमेंट है जो मध्यम वर्गीय निवेशकों और प्रवासियों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रॉपर्टी की टेबल पर बैठकर खरीदार 10 से 15 प्रतिशत तक के डिस्काउंट के लिए मोलभाव कर रहे हैं, और डील क्लोज करने के दबाव में सेलर्स को झुकना पड़ रहा है।

मार्च के महीने में आधिकारिक रजिस्ट्रेशन के आंकड़े भले ही कागजों पर सुधरे हुए दिखें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रियल एस्टेट ब्रोकर्स का दावा है कि मार्च की कुल बिक्री में 50% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जो रजिस्ट्रेशन अभी दिख रहे हैं, वे दरअसल दिसंबर से फरवरी के बीच फाइनल हो चुके सौदे हैं जो अब प्रोसेस हुए हैं। रमजान की सुस्ती के बाद अब डेवलपर्स की पूरी उम्मीदें अप्रैल के कारोबार पर टिकी हैं।

इस मंदी से निपटने के लिए डामैक (DAMAC), बिंगहट्टी (Binghatti) और डेन्यूब (Danube) जैसे बड़े खिलाड़ियों ने ऑफर्स की झड़ी लगा दी है। डामैक ने अपने पेमेंट प्लान को 70/30 के कड़े नियमों से हटाकर 50/50 कर दिया है, साथ ही खरीदारों को दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) की 4% रजिस्ट्रेशन फीस की छूट भी दी जा रही है।

सबसे आकर्षक ऑफर गाड़ियों का है; 15 लाख दिरहम से अधिक की प्रॉपर्टी पर ‘निसान पाथफाइंडर’ और 50 लाख दिरहम से ऊपर के विला पर ‘निसान पेट्रोल निस्मो’ जैसी लग्जरी कारें मुफ्त दी जा रही हैं।

वहीं अजीजी (Azizi) डेवलपर्स ने खरीदारों को राहत देने के लिए 30/70 का नया पेमेंट मॉडल पेश किया है, ताकि निवेश की शुरुआत में बड़ा वित्तीय बोझ न पड़े। जो निवेशक पूरा भुगतान नकद (Cash) कर रहे हैं, उन्हें बिंगहट्टी जैसे ग्रुप्स 20% तक का सीधा डिस्काउंट ऑफर कर रहे हैं। नेस्ट्रोव कंसल्टिंग के सीईओ शिवेंद्र सिंह का कहना है कि दुबई और अबू धाबी में सौदे पूरी तरह थमे नहीं हैं, लेकिन उनकी रफ्तार में भारी गिरावट आई है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले 6 से 9 महीने इस बाजार के लिए ‘एसिड टेस्ट’ साबित होंगे। दुबई के रियल एस्टेट एक्सपर्ट आदित्य अर्नेस्ट जॉन के अनुसार, बाजार अब एक बड़े ‘प्राइस करेक्शन’ की ओर बढ़ रहा है।

अनुमान है कि सेकेंडरी मार्केट में कीमतों में 15 से 18 प्रतिशत और ऑफ-प्लान (निर्माणाधीन) मार्केट में 9 से 12 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। अगले दो साल तक बाजार में किसी भी तरह की आक्रामक तेजी की संभावना नगण्य है, केवल स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है।


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Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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