गुजरात के गांधीनगर में इंदौर जैसी स्थिति बनने का खतरा मंडराने लगा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में टाइफाइड के लक्षण दिखने पर 104 संदिग्ध मरीजों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है, जिससे बाल चिकित्सा वार्ड में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि प्रभावित इलाकों में सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए निवासियों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई रखने की सख्त हिदायत दी है।
इन 5 इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
सिविल अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीता पारिख ने पुष्टि की है कि भर्ती मरीज मुख्य रूप से गांधीनगर के सेक्टर 24, 25, 26, 28 और आदिवाड़ा क्षेत्र से आए हैं। इन इलाकों से लिए गए पानी के सैंपल लैब रिपोर्ट में फेल हो गए हैं। पानी के असुरक्षित मिलने के बाद नगर निगम की स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं।
बचाव के तौर पर लोगों को क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं और पानी की टंकियों की सफाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ कहा है कि फिलहाल घर का बना ताजा खाना ही खाएं।
अमित शाह ने तीन बार लिया अपडेट
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद नजर बनाए हुए हैं। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि शाह ने जिलाधिकारी को तीन बार फोन कर हालात की जानकारी ली है। संघवी ने शनिवार को खुद अस्पताल का दौरा किया और व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
उन्होंने बताया कि मरीजों के इलाज के लिए 22 वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष टीम तैनात की गई है। साथ ही, भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल में भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम प्रशासन ने सुनिश्चित किया है।
इंदौर हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान जा चुकी है। इंदौर के भागीरथपुरा में प्रशासन ने अब तक 6 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय नागरिक और विपक्ष 6 महीने के बच्चे समेत 16 लोगों की मौत का दावा कर रहे हैं।
इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी 10 मौतों की जानकारी मिलने की बात कही थी। इसी डर के चलते गुजरात प्रशासन कोई कोताही नहीं बरतना चाहता और निगरानी तंत्र को पूरी तरह सख्त कर दिया गया है।



















