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Uttarakhand Homestay : अब केवल स्थायी निवासियों को मिलेगा लाभ, नई नियमावली मंजूर

उत्तराखंड कैबिनेट ने बुधवार को होम स्टे योजना में बड़ा बदलाव करते हुए इसे अब केवल राज्य के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित कर दिया है. इसके अलावा, केदारनाथ धाम में खच्चरों के गोबर से ईंधन बनाने के पायलट प्रोजेक्ट और कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल के कार्यक्षेत्र विस्तार को भी मंजूरी दी गई है.

Published on: January 16, 2026 6:30 PM
Uttarakhand Homestay : अब केवल स्थायी निवासियों को मिलेगा लाभ, नई नियमावली मंजूर
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HIGHLIGHTS

  • होम स्टे नीति में बदलाव: नई नियमावली-2026 मंजूर, योजना का लाभ अब सिर्फ उत्तराखंड के स्थायी निवासियों को मिलेगा.
  • केदारनाथ प्रोजेक्ट: खच्चर के गोबर और चीड़ की पत्तियों (50-50 अनुपात) से बायोमास पेलेट ईंधन तैयार होगा.
  • ब्रिडकुल का विस्तार: अब रोपवे, टनल और ऑटोमेटेड पार्किंग का निर्माण भी ब्रिडकुल कर सकेगा.

देहरादून : उत्तराखंड सचिवालय में बुधवार, 15 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में पर्यटन और रोजगार से जुड़े अहम फैसलों पर मुहर लगी है. सरकार ने राज्य में होम स्टे योजना के नियमों में बड़ा बदलाव किया है.

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कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड पर्यटन, यात्रा व्यवसाय, होम स्टे एवं बेड एंड ब्रेकफास्ट पंजीकरण नियमावली-2026’ को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद अब होम स्टे योजना का लाभ केवल राज्य के स्थायी निवासी ही उठा सकेंगे.

होम स्टे नियमों में एकरूपता और स्थानीय रोजगार

राज्य में अभी तक पर्यटन व्यवसाय के पंजीकरण के लिए 2014 और 2016 की अलग-अलग नियमावलियां चल रही थीं. वहीं, होम स्टे के लिए 2 अलग नियमावली प्रभावी थी. पर्यटन विभाग के अनुसार, कई नियमों के कारण भ्रम की स्थिति बन रही थी, जिसे अब दूर कर दिया गया है.

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों को उनके अपने घर में स्वरोजगार देना है. अब नई नियमावली-2026 के तहत स्थानीय लोग अपने स्वामित्व वाले परिसरों में होम स्टे चलाकर स्वावलंबन योजना का सीधा लाभ ले सकेंगे.

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केदारनाथ: गोबर और पिरूल से बनेगा ईंधन

कैबिनेट ने केदारनाथ धाम में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनोखे पायलट प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है. यात्रा मार्ग पर चलने वाले हजारों खच्चरों के गोबर का निस्तारण अब वैज्ञानिक तरीके से होगा.

सरकार ने एक साल के लिए उस प्रोजेक्ट को अनुमति दी है, जिसमें खच्चरों के गोबर और चीड़ की पत्तियों (पिरूल) को 50-50 के अनुपात में मिलाया जाएगा. इस मिश्रण से पर्यावरण-अनुकूल बायोमास पेलेट (ईंधन) तैयार किया जाएगा. इससे धाम में गंदगी की समस्या कम होगी और ऊर्जा का नया विकल्प भी मिलेगा.

ब्रिडकुल बनाएगा अब रोपवे और टनल

लंबे समय से सीमित दायरे में काम कर रही कार्यदायी संस्था ‘ब्रिडकुल’ (उत्तराखंड राज्य अवस्थापना विकास निगम) को सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. कैबिनेट ने ब्रिडकुल के कार्यक्षेत्र का विस्तार कर दिया है.

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अब यह संस्था राज्य में रोपवे, ऑटोमेटेड कार पार्किंग और टनल/कैविटी पार्किंग जैसे बड़े निर्माण कार्य भी कर सकेगी. इसे आधिकारिक तौर पर राज्य की सक्षम कार्यदायी संस्थाओं की सूची में शामिल कर लिया गया है.

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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