देहरादून : उत्तराखंड में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में अब 16 विशेष न्यायालय (Special Courts) स्थापित किए जाएंगे। बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। इन अदालतों के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने 144 नए पदों के सृजन को भी हरी झंडी दे दी है।
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किन जिलों में होगा गठन?
पहले चरण में ये विशेष अदालतें उन जिलों में शुरू की जा रही हैं, जहां मुकदमों की संख्या और विचाराधीन कैदियों का दबाव सबसे अधिक है। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में ये 16 कोर्ट खुलेंगे। इसमें दो स्तर की अदालतें शामिल हैं— सात अदालतें अपर जिला न्यायाधीश (ADJ) स्तर की होंगी, जबकि नौ अदालतें अपर मुख्य मजिस्ट्रेट (ACJM) स्तर की बनाई जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
इस फैसले का आधार सुप्रीम कोर्ट का 6 अगस्त 2024 का एक महत्वपूर्ण निर्णय है। सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई केस में शीर्ष अदालत ने जमानत प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जिन राज्यों में विचाराधीन कैदियों की संख्या ज्यादा है, वहां विशेष अदालतों का गठन किया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी, जिसने इन 16 अदालतों की सिफारिश की थी।
किन मामलों की होगी सुनवाई?
नई अदालतों का फोकस विशिष्ट प्रकृति के अपराधों पर रहेगा, ताकि सामान्य अदालतों पर भार कम हो सके। यहां मुख्य रूप से एनडीपीएस (मादक पदार्थ निरोधक कानून), पॉक्सो (बच्चों के खिलाफ अपराध), एनआई एक्ट (चेक बाउंस) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मुकदमों की सुनवाई होगी। विशेष कोर्ट होने के कारण यहां तारीखों का अंतराल कम होगा और फैसलों में तेजी आएगी।



















