Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड में जनवरी की कड़कड़ाती ठंड के बीच मौसम का एक अजीब पैटर्न सामने आया है। राज्य के पहाड़ इन दिनों मैदानों से ज्यादा गर्म हैं। मसूरी, मुक्तेश्वर और नैनीताल में तापमान सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस तक ऊपर चला गया है।
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मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर और जनवरी में अब तक बारिश की एक भी बूंद नहीं गिरी है और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) बेहद कमजोर रहा है, जिससे पहाड़ों पर धूप खिल रही है और बर्फ नदारद है।
हिल स्टेशनों का तापमान सामान्य से काफी ऊपर
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी के पहले पखवाड़े में पहाड़ों का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है। आमतौर पर इस समय मसूरी का औसत तापमान 10 डिग्री, मुक्तेश्वर का 12 डिग्री और नैनीताल का 13 डिग्री रहता है। लेकिन इस साल हालात जुदा हैं।
पहले पखवाड़े में मसूरी का औसत तापमान 16 डिग्री, मुक्तेश्वर का 18 डिग्री और नैनीताल का 17 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे ठंडे जिलों में भी पारा 20 डिग्री तक पहुंच रहा है, जो सामान्य से दो-तीन डिग्री ज्यादा है।
मैदानी जिले कोहरे से ठिठुरे
पहाड़ों के उलट, राज्य के मैदानी इलाके घने कोहरे और बर्फीली हवाओं की चपेट में हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में दिन का तापमान पहाड़ों से काफी कम दर्ज किया जा रहा है।
14 जनवरी को रुड़की में अधिकतम तापमान महज 9 डिग्री रहा, जबकि वहां सामान्य तापमान 18 डिग्री होना चाहिए था। इसी तरह पंतनगर में तापमान सामान्य से पांच डिग्री गिरकर 14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। जबकि उसी दिन पिथौरागढ़ का तापमान 20 डिग्री और टिहरी का 16.1 डिग्री था।
मसूरी और देहरादून का तापमान हुआ बराबर
हैरानी की बात यह है कि ऊंचाई पर बसे मसूरी और घाटी में बसे देहरादून का तापमान लगभग बराबर हो गया है। 15 जनवरी को मसूरी का अधिकतम तापमान 20.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब 9.9 डिग्री ज्यादा था।
वहीं, देहरादून का तापमान भी 20 डिग्री के आसपास बना हुआ है। अमूमन जनवरी में मसूरी और दून के तापमान में काफी अंतर रहता है, लेकिन बारिश न होने से यह खाई मिट गई है।
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जंगलों में धधक रही आग
सर्दियों में बारिश न होने और तापमान बढ़ने का असर वनों पर भी पड़ रहा है। सूखी ठंड के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। पिछले दो महीनों में राज्य के भीतर आग लगने की 25 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें करीब 15 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गए हैं। इससे वातावरण में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है।



















