Ankita Bhandari Case : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आज एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड के न्याय की मांग से थर्रा उठी। परेड ग्राउंड में ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले आयोजित महापंचायत में हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए। इस जनसमूह ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे वर्तमान सीबीआई जांच से संतुष्ट नहीं हैं। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए परेड ग्राउंड और आसपास के क्षेत्रों में भारी सुरक्षा बल तैनात किया है।
सीबीआई जांच पर सवाल और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने महापंचायत को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक ऐसे व्यक्ति (पर्यावरणविद अनिल जोशी) को शिकायतकर्ता बनाकर सीबीआई जांच शुरू करवाई है, जिसका अंकिता के परिवार से कोई संबंध नहीं है। रावत के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया उस “वीआईपी” को बचाने की एक सोची-समझी चाल है, जिसका नाम इस प्रकरण में बार-बार सामने आता रहा है। मंच से प्रस्ताव पारित किया गया कि जांच केवल सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में ही मान्य होगी।
अंकिता के माता-पिता और संगठनों की पांच प्रमुख मांगें
महापंचायत के दौरान अंकिता के माता-पिता भावुक नजर आए और उन्होंने अपनी बेटी के हत्यारों के साथ-साथ साक्ष्य मिटाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की। समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. सत्यनारायण सचान और भाकपा (माले) के सचिव इंद्रेश मैखुरी ने आरोप लगाया कि 3 साल के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई सीबीआई जांच केवल दिखावा है।
महापंचायत में पांच अहम प्रस्ताव पास किए गए, जिसमें अंकिता के माता-पिता की तहरीर को जांच का आधार बनाने और साक्ष्य मिटाने वाले अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाने की बात कही गई है।



















