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Electricity Strike 2026 : क्या 12 फरवरी को रहेगी बत्ती गुल? AIPEF ने दी लाइटनिंग एक्शन की धमकी

निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के खिलाफ देशभर के बिजली अभियंताओं ने मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का नोटिस दिया है। उत्तराखंड में यमुना और लखवाड़ परियोजना की जमीनों को अन्य विभागों को सौंपने के फैसले का भी कड़ा विरोध हो रहा है।

Published on: February 7, 2026 11:46 PM
Electricity Strike 2026 : क्या 12 फरवरी को रहेगी बत्ती गुल? AIPEF ने दी लाइटनिंग एक्शन की धमकी
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HIGHLIGHTS

  1. 12 फरवरी 2026 को देश भर के बिजली कर्मचारी और अभियंता एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे।
  2. इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 को संसद के बजट सत्र में पेश करने पर 'लाइटनिंग एक्शन' की चेतावनी दी गई है।
  3. उत्तराखंड में डाकपत्थर (यूजेवीएन) की जमीन यूआईडीबी को हस्तांतरित करने के आदेश को वापस लेने की मांग।
  4. कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन बहाली और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग पर अड़े हैं।

Electricity Strike 2026 : देश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की कोशिशों और नए इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल 2025 के खिलाफ देहरादून से लेकर दिल्ली तक आक्रोश फैल गया है।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने बजट सत्र के दौरान संसद में यह बिल पेश किया, तो देशभर के बिजली कर्मी तत्काल कार्य बहिष्कार कर सड़कों पर उतरेंगे। संगठन ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को इस संबंध में औपचारिक हड़ताल का नोटिस सौंप दिया है।

उत्तराखंड में बिजली क्षेत्र की जमीनों पर टकराव

उत्तराखंड में आंदोलन का मुख्य केंद्र यमुना जल विद्युत परियोजना और लखवाड़ बांध परियोजना की बेशकीमती जमीनों का हस्तांतरण बना हुआ है। डाकपत्थर में उत्तराखंड जल विद्युत निगम (UJVNL) की जमीन को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIDB) को सौंपने के सरकार के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया है।

अभियंताओं का आरोप है कि राज्य सरकार पावर सेक्टर की संपत्तियों को अन्य विभागों को देकर ऊर्जा सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है।

निजीकरण मॉडल और कर्मचारियों की प्रमुख चिंताएं

AIPEF के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे के अनुसार, प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 और वितरण क्षेत्र में मल्टी-लाइसेंसिंग व्यवस्था से सार्वजनिक स्वामित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने चंडीगढ़ के निजीकरण मॉडल को विफल बताते हुए कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग और पीपीपी मॉडल से जनता पर बोझ बढ़ेगा। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमीनों के हस्तांतरण का आदेश रद्द करने और केंद्र से ‘शांति एक्ट 2025’ (SHANTI Act) वापस लेने की पुरजोर मांग की है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 📧 Email: harpreetssoni9@gmail.com

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