दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर 2026) : त्योहारी बाजार सजने से ठीक पहले केंद्र सरकार के करीब 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों की आर्थिक सेहत सुधरने जा रही है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में 3 प्रतिशत की नई बढ़ोतरी और उत्पादकता आधारित बोनस को अंतिम मंजूरी दी जा सकती है।
अगर यह फैसला इसी हफ्ते हो गया, तो अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ही कर्मचारियों के खातों में अतिरिक्त रकम क्रेडिट होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
सूचकांक के गणित ने तय किया 63% का आंकड़ा

श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी औद्योगिक श्रमिकों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) ने भत्ते की नई दर तय कर दी है। दरअसल, साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में—संशोधित होने वाले इस भत्ते का आधार पिछले छह महीनों के मूल्य सूचकांक के औसत से तय होता है।
जनवरी 2026 में सूचकांक 148.6 था, जो लगातार बढ़ते हुए जून में 151.9 के स्तर पर जा पहुंचा। सांख्यिकीय फॉर्मूले के आधार पर गणना 63.78 प्रतिशत बैठती है। चूंकि नियम के मुताबिक सरकार दशमलव के बाद के अंकों को गिनती में नहीं लेती, लिहाजा देय दर ठीक 63% तय हुई है। वर्तमान में लागू 60% की दर के मुकाबले यह पूरे 3% की शुद्ध वृद्धि है।
तीन महीने का बकाया एरियर और बोनस की मांग
यह नया आदेश 1 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसका व्यावहारिक मतलब यह हुआ कि जब कर्मचारियों को अक्टूबर माह का वेतन मिलेगा, तब उन्हें जुलाई, अगस्त और सितंबर—इन तीन महीनों का बकाया एरियर (DA Arrears) एकमुश्त जोड़कर दिया जाएगा।
इधर, त्योहारी सीजन को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। ‘ऑल इंडिया न्यू पेंशनर्स एंड सर्विंग एम्प्लॉइज फेडरेशन’ (AINPSEF) और ‘कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज’ (CCGEW) ने वित्त मंत्रालय को औपचारिक प्रतिवेदन सौंपा है।
संगठनों की मांग है कि रेलवे, डाक और रक्षा उत्पादन से जुड़े गैर-राजपत्रित कर्मियों को मिलने वाले प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस की गणना पुरानी 7,000 रुपये की वैधानिक मासिक सीमा के बजाय अप्रैल 2026 के संशोधित वेज स्ट्रक्चर पर की जाए। यदि सरकार यह सीलिंग हटाती है, तो बोनस की वास्तविक राशि मौजूदा 18,000 रुपये के औसत स्लैब से काफी ऊपर निकल सकती है।
8वें वेतन आयोग के गणित पर क्या होगा असर?
बढ़ता हुआ महंगाई भत्ता केवल तात्कालिक राहत नहीं है। सातवें वेतन आयोग के अंतर्गत जब कुल डीए 50 प्रतिशत की सीमा लांघता है, तो हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और चिल्ड्रन्स एजुकेशन अलाउंस जैसे भत्तों के स्लैब में भी स्वतः आनुपातिक बदलाव आता है। अब जब यह दर 63% पर पहुंच रही है, तो आने वाले समय में बनने वाले 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की रूपरेखा पर इसका गहरा असर पड़ना तय है।
वेतन आयोगों की सामान्य परंपरा रही है कि नए पे-कमीशन के गठन के वक्त तत्कालीन मूल वेतन (Basic Pay) में मौजूदा महंगाई भत्ते को समाहित करके ही नया फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है। ऐसे में 63% का यह मजबूत आधार कर्मचारियों के भविष्य के न्यूनतम वेतन को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण बेंचमार्क साबित होगा।











