EPFO Wage Ceiling : संगठित क्षेत्र के दफ्तरों में सितंबर माह का पे-रोल प्रोसेस होते ही कर्मचारियों की सैलरी स्लिप में अजीबोगरीब आंकड़े देखने को मिल सकते हैं। कारण है—कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा अनिवार्य अंशदान की वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करना। 17 सितंबर की तारीख से अमल में आई इस व्यवस्था ने इस माह के वेतन को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है।
सीधा गणित यह है कि महीने के शुरुआती 16 दिन पुरानी व्यवस्था में गिने गए, जबकि बाकी के 14 दिन नए नियम के अधीन आ गए।
पहली बार दायरे में आए कर्मी

यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर 20,000 रुपये है और वह 16 सितंबर तक अनिवार्य कवरेज से बाहर था, तो उस पर पुराने 16 दिनों की कोई देनदारी नहीं बनती। कंपनी केवल 17 से 30 सितंबर के 14 दिनों का आनुपातिक वेतन यानी लगभग 9,333 रुपये आधार मानेगी।
नियम के मुताबिक, कर्मचारी के हिस्से का 12 प्रतिशत अंशदान काटा जाएगा। यह रकम करीब 1,120 रुपये बैठती है। ऐसे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में बहुत मामूली कमी दर्ज होगी, लेकिन भविष्य निधि खाते में औपचारिक बचत की शुरुआत इसी माह से दर्ज हो जाएगी।
पुराने सदस्य लेकिन नए पेंशनधारक
दूसरी श्रेणी उन लोगों की है जो 15,000 रुपये से अधिक वेतन होने के बावजूद पहले अपनी मर्जी से केवल EPF का हिस्सा थे, लेकिन EPS का लाभ नहीं ले रहे थे। 17 सितंबर से सीमा बढ़ते ही वे पेंशन योजना के दायरे में भी आ गए।
ऐसे मामले में कटौती पूरे 20,000 रुपये के वेतन पर 12 फीसदी की दर से 2,400 रुपये ही होगी। फर्क नियोक्ता के हिस्से में आएगा। कंपनी का 12 प्रतिशत अंशदान दो टुकड़ों में बंटेगा—3.67 फीसदी ईपीएफ में और 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में। साथ ही, संस्थान को 7 लाख रुपये तक के मुफ्त बीमा कवर के लिए एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) में 0.5 प्रतिशत अलग से जमा करना होता है, जो कर्मचारी की जेब से नहीं कटता।
जो पहले से दोनों योजनाओं में थे
सबसे पेचीदा हिसाब उन पुराने कर्मचारियों का है जो पहले से दोनों लाभ ले रहे थे।
इनके वेतन की गणना 1 से 16 सितंबर तक 15,000 रुपये की पुरानी सीमा (आनुपातिक रूप से ₹8,000) पर होगी, और 17 से 30 सितंबर तक वास्तविक 20,000 रुपये के वेतन (आनुपातिक रूप से ₹9,333) पर की जाएगी। दोनों को मिलाकर कुल गणना योग्य वेतन 17,333 रुपये बना। इस राशि पर 12 प्रतिशत के हिसाब से 2,080 रुपये काटे जाएंगे।
अक्टूबर महीने से यह स्प्लिट फॉर्मूला खत्म हो जाएगा और पूरे 30 दिनों के आधार पर 25 हजार रुपये की नई सीमा के तहत एकमुश्त 2,400 रुपये मासिक डिडक्शन शुरू होगा।











