Hariyali Teej Puja Niyam : सावन के महीने में हरियाली तीज का त्योहार बेहद खास माना जाता है। यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में मिठास घोलने का अवसर लेकर आता है।
इस बार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से 15 अगस्त, शनिवार को ही हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा।
इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे मन से पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि सही विधि और शांत मन से की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि लाती है।
इस बार बन रहे हैं ये खास संयोग
इस साल हरियाली तीज के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के साथ-साथ शिव और सिद्ध योग का सुंदर मेल बन रहा है। धार्मिक दृष्टिकोण से इन शुभ योगों में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पूजा के शुभ मुहूर्त

- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से 5:35 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 1:08 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:51 बजे से 3:42 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:06 बजे से 7:29 बजे तक
- अमृत काल: रात 8:18 बजे से 9:53 बजे तक
आसानी से करें पूजा
तैयारी पहले करें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हरे या साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। हाथों में मेहंदी लगाएं और 16 श्रृंगार करें।
चौकी सजाएं: पूजा के स्थान को साफ करके माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
गणेश पूजन से शुरुआत: सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें जल, अक्षत व फूल चढ़ाएं।
शिव-पार्वती का पूजन: भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। माता पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
कथा और आरती: शांत मन से बैठकर हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद धूप-दीप से आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
हरियाली तीज पर क्या करें और किन बातों से बचें?
सेहत का रखें ख्याल: वैसे तो इस दिन निर्जला व्रत रखने की परंपरा है, लेकिन अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है या कोई चिकित्सीय स्थिति है, तो आप फलाहार या पानी पीकर भी व्रत रख सकती हैं। श्रद्धा से किया गया पूजन ही सबसे महत्वपूर्ण है।
मन शांत रखें: तीज का त्योहार रिश्ते में प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। इस दिन घर में विवाद या बहस से बचें और आपस में कड़वे शब्द न बोलें।
पूजा सामग्री पहले जुटाएं: आखिरी समय की आपाधापी से बचने के लिए बेलपत्र, फूल, फल, दीप और प्रसाद जैसी जरूरी चीजें एक दिन पहले ही एकत्र कर लें।














