Africa Gerewol Festival : दुनिया के नक्शे पर अफ्रीका का साहेल इलाका एक ऐसी परंपरा का गवाह है जो आधुनिक समाज की हर सोच को चुनौती देती है। यहाँ रहने वाली वोडाबे (Wodaabe) जनजाति में पितृसत्तात्मक सोच के उलट महिलाओं को वो अधिकार प्राप्त हैं, जिनकी कल्पना भी मुश्किल है।
इस जनजाति के वार्षिक ‘गेरेवोल’ (Gerewol) फेस्टिवल में मर्द अपनी मर्दानगी का नहीं, बल्कि अपनी सुंदरता का प्रदर्शन करते हैं ताकि उन्हें जीवनसाथी के रूप में चुना जा सके। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि मर्दों के लिए एक कठिन सौंदर्य परीक्षा है।
इस दौरान पुरुष अपने चेहरे पर पीली और लाल मिट्टी का लेप लगाते हैं। आंखों की सफेदी को उभारने के लिए काले कोयले का इस्तेमाल किया जाता है और होठों को काला रंगा जाता है ताकि हंसते समय उनके दांत मोतियों की तरह चमकें।
वोडाबे समाज में लंबी कद-काठी, पतली नाक और सफेद दांत ही एक ‘सुंदर पुरुष’ की असली पहचान माने जाते हैं। उत्सव का सबसे रोमांचक हिस्सा ‘याके’ (Yaake) नृत्य है। इसमें पुरुष घंटों तक एक कतार में खड़े होकर नाचते हैं और अपनी आंखों को गोल-गोल घुमाते हुए दांत दिखाते हैं।
कतार के सामने खड़ी महिलाएं बारीकी से हर पुरुष के चेहरे के हाव-भाव और उसकी कद-काठी का निरीक्षण करती हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस समाज में ‘पति चोरी’ की प्रथा को बुरा नहीं माना जाता।
अगर किसी विवाहित महिला को नृत्य कर रहा कोई दूसरा पुरुष पसंद आ जाता है, तो वह उसके साथ भाग सकती है। इसे समाज में ‘चोरी’ के बजाय आपसी सहमति और प्रेम का मिलन माना जाता है।
यहाँ महिलाएं एक समय में एक से अधिक पति भी रख सकती हैं और उन्हें अपना पिछला रिश्ता तोड़ने के लिए किसी कानूनी कार्यवाही की जरूरत नहीं होती। परंपराएं यहीं खत्म नहीं होतीं। वोडाबे जनजाति में संतान को लेकर एक अजीबोगरीब धारणा है।
अगर किसी पुरुष को लगता है कि वह सुंदर नहीं है या उसकी संतान शारीरिक रूप से कमजोर हो सकती है, तो वह अपनी पत्नी को किसी अधिक सुंदर और स्वस्थ पुरुष के साथ संबंध बनाने की इजाजत देता है।
उनका मानना है कि इससे आने वाली पीढ़ी अधिक आकर्षक और गुणवान पैदा होगी। घुमंतू जीवन जीने वाली यह जनजाति आज भी बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप से दूर अपनी इन रीतियों को गर्व से निभा रही है।














