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नौकरी बदली तो अब नहीं चाहिए बॉस की मंजूरी, ऑटो-मोड पर ट्रांसफर होंगे पीएफ के पैसे

श्रम मंत्रालय ने लोकसभा में EPFO 3.0 प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश की है, जिसमें जून 2026 तक ईपीएफओ को पूरी तरह डिजिटल बनाने का लक्ष्य है। ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है और जल्द ही सदस्य UPI के जरिए भी अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे।

Published On: अप्रैल 5, 2026 8:56 अपराह्न
नौकरी बदली तो अब नहीं चाहिए बॉस की मंजूरी, ऑटो-मोड पर ट्रांसफर होंगे पीएफ के पैसे

HIGHLIGHTS

  • ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई, जिससे मानवीय हस्तक्षेप खत्म होगा।
  • 1 जनवरी 2025 से लागू सेंट्रललाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम (CPPS) से 70 लाख लाभार्थियों को लाभ।
  • पीएफ जमा पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर बरकरार रखने का फैसला।

नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों अंशधारकों को बड़ी राहत देते हुए अपने पूरे ढांचे को डिजिटल पटरी पर ले आया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘EPFO 3.0’ पहल के तहत अब पीएफ निकासी की प्रक्रिया उतनी ही आसान होगी जितना मोबाइल ऐप से पैसे भेजना। श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में इस बड़े रिफॉर्म की जानकारी साझा की है।

संगठन के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा यह क्रांतिकारी बदलाव जून 2026 तक पूरी तरह जमीन पर उतर जाएगा। सबसे बड़ा अपडेट यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI को लेकर है। सालों से सिस्टम की खामियों और सर्विस डिलीवरी में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए अब यूपीआई के जरिए निकासी की सुविधा पर काम चल रहा है। इसका सीधा मकसद सदस्यों के यूजर एक्सपीरियंस को सरल और पारदर्शी बनाना है।

ऑटो-सेटलमेंट की सीमा में बंपर बढ़ोतरी

EPFO ने क्लेम सेटलमेंट की रफ्तार बढ़ाने के लिए ऑटो-मोड का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। जून 2025 में ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 लाख रुपये कर दिया गया था। आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 25 फरवरी 2026 तक 3,52,20,199 क्लेम्स को इसी ऑटोमेटेड तरीके से प्रोसेस किया गया है। अब 5 लाख तक की राशि के लिए किसी अधिकारी के सिग्नेचर या जांच का इंतजार नहीं करना पड़ता।

नौकरी बदलने पर नहीं चाहिए बॉस की हरी झंडी

पुराने दौर में नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर करना एक सिरदर्द होता था, लेकिन अब यह इतिहास बन चुका है। जिन अकाउंट्स के केवाईसी (KYC) पूरे हैं, उनके ट्रांसफर क्लेम के लिए अब पुराने या नए एम्प्लॉयर (मालिक) की मंजूरी अनिवार्य नहीं है। सरकारी डेटा के मुताबिक, 25 फरवरी 2026 तक 21.39 लाख से ज्यादा कर्मचारियों ने बिना किसी नियोक्ता के हस्तक्षेप के अपने क्लेम जमा किए हैं।

CPPS और पेंशन का नया गणित

पेंशनभोगियों के लिए 1 जनवरी 2025 का दिन मील का पत्थर साबित हुआ है। इस तारीख से देश के सभी EPFO कार्यालय ‘सेंट्रललाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम’ (CPPS) पर शिफ्ट हो चुके हैं। वर्तमान में लगभग 70 लाख बुजुर्गों को इस सिस्टम से पेंशन मिल रही है। इसके अलावा, एडवांस विड्रॉल के मामले में भी संगठन ने तेजी दिखाई है। लगभग 51,620 करोड़ रुपये के 70 फीसदी से ज्यादा रिक्वेस्ट सफलतापूर्वक निपटाए जा चुके हैं।

ब्याज दर और ट्रस्टों के लिए माफी योजना

पीएफ जमा पर ब्याज को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25 फीसदी तय की गई है, जो लगातार तीसरे साल इसी स्तर पर बनी हुई है। वहीं, आयकर-मान्यता प्राप्त ट्रस्टों के लिए ‘एम्नेस्टी स्कीम’ (माफी योजना) शुरू की गई है। यह 6 महीने का विशेष कार्यक्रम है, जिसमें नियमों का पालन न करने वाले ट्रस्टों को जुर्माना और हर्जाने में छूट दी जा रही है, ताकि वे कानूनी दायरे में आकर कर्मचारियों के हितों की रक्षा कर सकें।

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में बदलाव

कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने पुराने पेचीदा नियमों को खत्म कर एक सरल एसओपी (SOP) को मंजूरी दी है। अब ‘छूट नियमावली’ और चार अलग-अलग एसओपी को एक ही दस्तावेज में मर्ज कर दिया गया है। इसके साथ ही ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ के तहत नई योजनाओं को लागू करने का रास्ता भी साफ हो गया है, जिससे भविष्य में पीएफ और पेंशन का पूरा इकोसिस्टम बदल जाएगा।

Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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