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उत्तराखंड वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी से लेकर कमिश्नर और विधायकों तक को मिले नोटिस

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर त्रुटियां सामने आई हैं। चुनाव आयोग ने नाम, पते और मैपिंग की गलतियों को लेकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, कुमाऊं कमिश्नर और कई विधायकों सहित 19 लाख लोगों को सुधार के नोटिस थमा दिए हैं।

VVIPs in Uttarakhand Receive Voter List Correction Notices

HIGHLIGHTS

  • 19 लाख मतदाताओं को भेजे जा चुके हैं एसआईआर नोटिस
  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पिता के नाम में मिली गड़बड़ी
  • कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने सुधरवाया वोटर लिस्ट में नाम
  • बुजुर्गों और दिव्यांगों के घर जाकर होगा शिकायतों का समाधान

देहरादून, 6 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Voter List : उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने नौकरशाही से लेकर राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। राज्य भर में नाम, पते और मैपिंग की गड़बड़ियों को दुरुस्त करने के लिए निर्वाचन आयोग पूरी सख्ती बरत रहा है। आम जनता के साथ-साथ राज्य के वर्तमान मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और राजनीतिक दलों के बड़े पदाधिकारियों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम खुद भी इस प्रक्रिया से अछूते नहीं रहे। उनके पिता के नाम की वर्तनी में विसंगति पाई गई, जिसके बाद उन्हें सीधे नोटिस थमा दिया गया। एक आम नागरिक की तरह उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बीएलओ को सही दस्तावेज सौंपकर इस त्रुटि का निस्तारण कराया।

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का नाम 2003 की मतदाता सूची में केवल ‘दीपक’ दर्ज चला आ रहा था। सालों पुरानी इस गलती को सुधारने के लिए उन्होंने अब बीएलओ को अपने दस्तावेज दिए हैं। कमिश्नर ने नोटिस प्राप्त करने वाले सभी लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय समय पर अपने दस्तावेज बीएलओ को उपलब्ध कराएं ताकि किसी का भी नाम मतदाता सूची से बाहर न हो।

प्रशासनिक स्तर पर कई अन्य बड़े अधिकारियों को भी उनके नाम व पते में त्रुटियों के निवारण के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। काशीपुर एसडीएम अभय प्रताप सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी सीमा बंग्वाल और एपीडी विम्मी जोशी के रिकॉर्ड में कमियां सामने आई हैं। सरकारी मशीनरी अपने ही अधिकारियों के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने में पूरी ताकत झोंक रही है।

हरिद्वार से पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। पौड़ी के प्रसिद्ध साहित्यकार नरेंद्र कठैत को भी नाम कटने पर नोटिस जारी किया गया है। विधानसभा चुनाव में बदरीनाथ से प्रत्याशी रहे नवल किशोर खाली, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी मुन्नी तिवारी और पूर्व ब्लॉक प्रमुख कमलेश कैड़ा को सुनवाई और अभिलेख सत्यापन के लिए तलब किया गया है।

विधायकों की सूची में भी भारी गड़बड़ियां दर्ज हुई हैं। विधायक सविता कपूर को विवाह पूर्व नाम संशोधन, रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ को अपने नाम में ‘काऊ’ जोड़ने और नैनीताल विधायक सरिता आर्या को पता सुधारने के लिए नोटिस मिला है। खटीमा विधायक भुवन चंद्र कापड़ी और उनके परिवार को भी निर्वाचन विभाग ने नोटिस भेजा है।

पूर्व विधायकों के रिकॉर्ड भी त्रुटिपूर्ण पाए गए हैं। दिवंगत हरबंश कपूर के पारिवारिक सदस्यों को ‘हरबंस’ और ‘हरवंश’ की वर्तनी के फेर में नोटिस भेजे गए हैं। पूर्व विधायक रुद्रपुर राजकुमार ठुकराल के भाई संजय ठुकराल और किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ की पत्नी को भी रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए नोटिस प्राप्त हुए हैं।

विपक्षी और सत्ताधारी दलों के पदाधिकारी भी एसआईआर के रडार पर हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य और उनकी पुत्रवधू, यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष शिव शंकर भाटिया और उनकी पत्नी को नाम या पते की विसंगतियों पर नोटिस मिले हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज, पूर्व जिलाध्यक्ष निर्मला गहतोड़ी, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा और यूथ कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव ऋषेंद्र महर को अपने दस्तावेज सत्यापित कराने होंगे।

निर्वाचन विभाग ने एसआईआर के तहत 24 लाख मतदाताओं का लक्ष्य रखा था। इनमें से अब तक 19 लाख लोगों (लगभग 77 प्रतिशत) तक नोटिस पहुंचाए जा चुके हैं। फार्म-6 के 93 हजार, फार्म-7 के 1 लाख 39 हजार और फार्म-8 के 40 हजार से अधिक आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुके हैं।

बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एसआईआर पर अहम बैठक की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि एक मतदाता अधिकतम पांच मामलों में ही दावे एवं आपत्तियां प्रस्तुत कर सकता है। अगर इससे ज्यादा मामले आते हैं, तो ईआरओ स्वयं अपने स्तर पर जांच और सत्यापन की कार्रवाई करेंगे।

राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की सीमाएं भी तय कर दी गई हैं। बीएलए एक दिन में अधिकतम 10 फार्म प्रस्तुत कर सकते हैं। पुनरीक्षण की पूरी अवधि के दौरान 30 फार्म प्रस्तुत करने पर ईआरओ सीधे तौर पर सत्यापन और जांच करेंगे।

65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं को चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है। इन मतदाताओं को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। एसआईआर प्रक्रिया के तहत इनके घर जाकर ही नोटिसों की सुनवाई और निस्तारण किया जाएगा। कुमाऊं और गढ़वाल के मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक में इसके सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी शिकायतों का बड़ा मुद्दा चुनाव अधिकारी के समक्ष उठाया है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन पोर्टल पर अज्ञात लोग फर्जी शिकायतें कर रहे हैं, जिनके आधार पर वैध मतदाताओं को नोटिस थमाए जा रहे हैं। मंगलौर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए धस्माना ने झूठे शिकायतकर्ताओं पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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