Nag Panchami Gudiya Parampara : सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को देशभर में नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करके परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना की जाती है।
लेकिन पूजा-पाठ के अलावा उत्तर प्रदेश और खासकर बुंदेलखंड के इलाकों में इस दिन एक बेहद अनोखी रस्म भी निभाई जाती है। यहां लोग कपड़े से बनी गुड़िया को डंडों से पीटकर इस त्योहार की परंपरा पूरी करते हैं।
पहली नजर में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी लोककथा और गहरा सामाजिक संदेश छिपा है।

कैसे निभाई जाती है यह रस्म?
त्योहार के दिन घर की लड़कियां और महिलाएं पुराने रंग-बिरंगे कपड़ों से छोटी-छोटी गुड़िया बनाती हैं। इसके बाद इन गुड़ियों को गांव या मोहल्ले के किसी खुले स्थान, चौराहे या तालाब किनारे रखा जाता है।
वहां परिवार के लड़के और पुरुष लाठी या डंडों से इन गुड़ियों पर प्रतीकात्मक प्रहार करते हैं। इसके बाद नाग देवता से क्षमा और आशीर्वाद मांगकर पूजा संपन्न होती है।
भाई-बहन के स्नेह और भूल से जुड़ी कथा
इस लोक परंपरा की जड़ें एक प्राचीन कथा से जुड़ी हैं। कथा के अनुसार, एक शिव भक्त युवक था जो नियमित रूप से मंदिर जाकर भोलेनाथ की सेवा करता था।
मंदिर के पास रहने वाला एक नाग युवक की भक्ति और शांत स्वभाव से काफी प्रभावित था और अक्सर उसके पैरों से लिपटकर बैठ जाता था, बिना कोई नुकसान पहुंचाए।
एक दिन वह युवक अपनी बहन को भी मंदिर लेकर गया। पूजा के बाद जब वे लौटने लगे, तो सांप हमेशा की तरह स्नेहवश भाई के पैर से लिपट गया।
अनजाने में हुआ अपराध और प्रायश्चित
भाई के पैर पर सांप को देखकर बहन बुरी तरह घबरा गई। उसे लगा कि सांप उसके भाई को डस लेगा। भाई की जान बचाने के लिए उसने बिना सोचे-समझे पास पड़े डंडे से सांप पर वार कर दिया, जिससे सांप की मौके पर ही मौत हो गई।
जब इस घटना की जानकारी गांव के लोगों को हुई, तो सबने माना कि यह नाग देवता का अनजाने में हुआ वध था, जिसका प्रायश्चित जरूरी है।
चूंकि बहन की मंशा भाई को बचाने की थी और उसने जानबूझकर यह पाप नहीं किया था, इसलिए उसे सीधी सजा देने के बजाय कपड़े की एक प्रतीकात्मक गुड़िया बनाई गई।
गांव वालों ने उस गुड़िया को डंडों से पीटकर प्रतीकात्मक रूप से न्याय और प्रायश्चित की रस्म पूरी की।
क्या सीख देती है यह परंपरा?
यह रस्म केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज में दो बड़े संदेश दिए जाते हैं:
प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता: किसी भी जीव को बिना कारण नुकसान न पहुंचाना और यदि भूलवश कोई गलती हो जाए तो उसका प्रायश्चित करना।
दोषों और नकारात्मकता का अंत: कपड़े की गुड़िया पर लाठी चलाने का एक भाव यह भी माना जाता है कि व्यक्ति अपने भीतर के भय, अहंकार और पुराने दोषों को समाप्त कर रहा है।















