Nag Panchami Stuti Mantra : नाग पंचमी का दिन सनातन परंपरा में नाग देवता की पूजा और उनसे सुरक्षा की प्रार्थना के लिए समर्पित है।
इस बार यह पर्व सावन के तीसरे सोमवार के साथ पड़ा है, जिससे भगवान शिव और नाग देवता की संयुक्त पूजा का महत्व और बढ़ गया है।
ग्रामीण अंचलों, खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों या जिनके मन में अनजाना सर्प भय रहता है, उनके लिए इस दिन मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना गया है।
नाग पंचमी पर जपने योग्य 3 प्रमुख मंत्र
1. सर्प सुरक्षा मंत्र
सर्पानां पादमस्तकं यः स्मरेन्नियतः सदा।
न सर्पभयं तस्य सर्वत्र विजयं लभेत्।।
यह मंत्र यात्रा, खेतों में काम करते समय या अनजान रास्तों पर चलने के दौरान सुरक्षा का भाव देता है। परंपरा के अनुसार, इस मंत्र का स्मरण करने से मन से भय निकलता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
2. अष्टनाग स्तुति मंत्र
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
इस श्लोक में आठ प्रमुख नाग देवताओं—अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र और तक्षक की आराधना की जाती है। नाग पंचमी के दिन इसका 11 या 21 बार पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों का भय दूर होता है।
3.ॐ नागराजाय नमः
अगर संस्कृत के कठिन श्लोकों का उच्चारण करने में परेशानी हो, तो यह सरल और छोटा मंत्र सबसे बेहतर विकल्प है। घर के बड़े-बुजुर्ग और बच्चे भी इसका स्पष्ट उच्चारण कर सकते हैं। रुद्राक्ष की माला से 108 बार इसका जाप करना उत्तम माना जाता है।
मंत्र जाप की सरल और सही विधि
- सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें।
- नाग देवता की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक और धूप जलाएं।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
- मन को शांत रखते हुए रुद्राक्ष या तुलसी की माला से मंत्र का शांत भाव से जाप करें।जाप पूरा होने के बाद नाग देवता से अपने घर और परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना करें।
नाग पंचमी के दिन श्रद्धापूर्वक किया गया मंत्र जाप मन के संशय और भय को दूर कर मानसिक शांति प्रदान करता है।




