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RBI Repo Rate : 5 अगस्त को आएगा रिजर्व बैंक का फैसला, क्या सस्ते होंगे लोन या बढ़ेगी ईएमआई?

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Amit Gawri Updated Mon, 03 Aug 2026 01:27 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक 3 से 5 अगस्त तक आयोजित की जा रही है, जिसमें रेपो रेट को लेकर अहम निर्णय लिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और अनिश्चित मानसून को देखते हुए ज्यादातर विशेषज्ञ मौजूदा ब्याज दरों में किसी बदलाव की संभावना नहीं जता रहे हैं।

RBI Repo Rate : 5 अगस्त को आएगा रिजर्व बैंक का फैसला, क्या सस्ते होंगे लोन या बढ़ेगी ईएमआई?

मुख्य बातें

  • RBI MPC बैठक 3 से 5 अगस्त 2026 को होगी
  • 5 अगस्त को रेपो रेट पर आधिकारिक फैसला आएगा
  • विशेषज्ञ मौजूदा ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद कर रहे
  • पिछले साल से अब तक रेपो रेट 1.25% घटा है

RBI Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक 3 अगस्त से शुरू होकर 5 अगस्त तक चलेगी। 5 अगस्त की सुबह केंद्रीय बैंक रेपो रेट को लेकर अपनी नई नीति का ऐलान करेगा। कर्जदारों और बैंकिंग सेक्टर की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रिजर्व बैंक इस बार ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बढ़ते दाम और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में कोई कदम उठाने से बचना चाहता है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल रही हैं। मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यदि यह स्थिति लंबी खींचती है तो भारत में आयातित महंगाई का दबाव तेजी से बढ़ेगा।

मानसून की चाल भी नीतिगत फैसलों के लिए निर्णायक बनी हुई है। देश के कुछ हिस्सों में बारिश का रुझान असमान रहा है। पर्याप्त बारिश होने की स्थिति में ही खाद्य वस्तुओं के दाम नियंत्रण में रहेंगे, अन्यथा आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हालिया बयानों में स्पष्ट किया है कि संस्था का मुख्य ध्यान महंगाई को नियंत्रित करने पर है। गवर्नर ने संकेत दिए हैं कि जब तक रिटेल महंगाई दर तय दायरे में नहीं आ जाती, तब तक आक्रामक नरमी बरतना जोखिम भरा हो सकता है।

रिजर्व बैंक ने पिछले साल से अब तक नीतिगत ब्याज दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। इस कटौती का उद्देश्य बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देना था। बैंक प्रबंधन अब देखना चाहता है कि इन पुरानी कटौतियों का जमीनी स्तर पर कितना असर हुआ है।

यदि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान महंगाई दर अनुमान से अधिक बनी रहती है, तो रिजर्व बैंक आगे चलकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रुख भी अपना सकता है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर परिस्थितियां बिगड़ीं तो इस चालू वित्त वर्ष में दो बार दरों में बढ़ोतरी संभव है।

5 अगस्त को आने वाले बयान में चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर और रिटेल महंगाई के अनुमानों में भी संशोधन किया जा सकता है। घरेलू मांग मजबूत रहने से जहां विकास दर के आंकड़े को सहारा मिल रहा है, वहीं वैश्विक सुस्ती और महंगे ईंधन आयात के कारण विकास दर की रफ्तार सीमित रहने की आशंका भी जताई जा रही है।

बैंकिंग प्रणाली में नकदी के प्रबंधन को लेकर भी इस बैठक में किसी बड़े नए ऐलान की संभावना कम है। रिजर्व बैंक जरूरत पड़ने पर रेपो ऑक्शन और ओपन मार्केट ऑपरेशन्स के जरिए बाजार में तरलता का संतुलन बनाए रखेगा।

Amit Gawri

अमित गावरी 'दून हॉराइज़न' में राष्ट्रीय समाचार लेखक के रूप में देश भर की ब्रेकिंग न्यूज़ और महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं। चुनाव, सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उनकी खास विशेषज्ञता है। अमित हमेशा तथ्यों की गहराई में जाकर रिपोर्टिंग करते हैं, ताकि पाठकों को किसी भी खबर का हर पहलू स्पष्ट रूप से समझ आ सके। क्लिकबेट से दूर रहकर, वे अपनी खबरों में सटीकता और विश्वसनीयता (Trust) बनाए रखते हैं। उनका जर्नलिस्टिक अप्रोच हमेशा जनसरोकार और सटीक सूचना देने पर ही केंद्रित रहता है।

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