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Slow Metabolism Symptoms : स्लो मेटाबॉलिज्म बिगाड़ सकता है सेहत, इन शुरुआती लक्षणों से करें पहचान

धीमा मेटाबॉलिज्म न सिर्फ वजन बढ़ाता है बल्कि शरीर में कई बीमारियों का जोखिम भी खड़ा कर देता है। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर जीवनशैली में सुधार करना आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए जरूरी है।

Published On: August 14, 2026 9:48 AM
Slow Metabolism Symptoms

Slow Metabolism Symptoms : अक्सर वजन बढ़ने, थकान या चिड़चिड़ेपन को हम सिर्फ काम के तनाव और गलत खानपान से जोड़कर छोड़ देते हैं।

हालांकि कई मामलों में इसके पीछे की असली वजह धीमा मेटाबॉलिज्म हो सकती है। मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है जो हमारे भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करती है।

जब यह प्रक्रिया सुस्त पड़ जाती है, तो शरीर कैलोरी बर्न करने में नाकाम रहने लगता है। इसका सीधा असर हमारे एनर्जी लेवल, हार्मोन्स और ओवरऑल हेल्थ पर पड़ता है।

लंबे समय तक इस पर ध्यान न देने से फैटी लिवर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बीपी जैसी समस्याएं जन्म ले सकती हैं।

यदि आपका शरीर भी नीचे दिए गए संकेत दे रहा है, तो संभल जाने का वक्त आ गया है:

बिना ज्यादा खाए भी तेजी से वजन बढ़ना

कम खाने या रेगुलर वर्कआउट के बाद भी अगर वजन घट नहीं रहा या तेजी से बढ़ रहा है, तो यह सुस्त मेटाबॉलिज्म का सबसे बड़ा लक्षण है। जब कैलोरी सही से बर्न नहीं होतीं, तो वे फैट के रूप में जमा होने लगती हैं।

पूरी नींद के बावजूद लगातार थकान

आठ घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी अगर आप सुस्त महसूस करते हैं, तो समझें कि शरीर भोजन को प्रॉपर एनर्जी में नहीं बदल पा रहा है। ऊर्जा की इस कमी से दिनभर आलस और थकावट बनी रहती है।

हमेशा बनी रहने वाली पाचन की दिक्कतें

मेटाबॉलिज्म स्लो होने का सीधा असर आपके डाइजेशन पर पड़ता है। भोजन सही से पचाने में परेशानी होती है, जिससे कब्ज, पेट फूलना और खाने के बाद भारीपन महसूस होना आम बात बन जाती है।

दूसरों से ज्यादा ठंड लगना

मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर का अंदरूनी तापमान बनाए रखने का काम भी करता है। जब यह धीमा होता है, तो शरीर में पर्याप्त गर्मी नहीं बन पाती। यही वजह है कि सामान्य मौसम में भी अधिक ठंड महसूस होने लगती है।

मीठा और जंक फूड खाने की तेज क्रेविंग

जब सेल्स को सही मात्रा में एनर्जी नहीं मिलती, तो दिमाग तुरंत एनर्जी देने वाली चीजों की डिमांड करता है। इसके चलते बार-बार मीठा, तला-भुना या जंक फूड खाने की इच्छा होने लगती है।

ड्राई स्किन और बालों का कमजोर होना

धीमी मेटाबॉलिक रेट के कारण शरीर पोषक तत्वों को सही से एब्जॉर्ब और रिपेयर नहीं कर पाता। इसका असर आपकी बाहरी त्वचा और बालों पर दिखता है—स्किन सूखी और बेजान हो जाती है, जबकि बाल झड़ने लगते हैं।

हर वक्त सुस्ती और फोकस में कमी

एनर्जी का लेवल लो रहने से न सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। काम में ध्यान न लगना, बार-बार झपकी आना और मिजाज में चिड़चिड़ापन रहना इसी का नतीजा है।

क्या करें और कैसे सुधारें?

मेटाबॉलिज्म को दोबारा ट्रैक पर लाने के लिए अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें:

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
  • डाइट में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं।
  • दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं।
  • पूरी नींद लें और रात को समय पर सोने की आदत डालें।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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