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Constipation Relief Tips : क्या दिनभर पेट भारी और फूला रहता है? जानिए आंतों को एक्टिव रखने का सही तरीका

सुबह पेट ठीक से साफ न होना और भारीपन महसूस होना खराब लाइफस्टाइल और कम फाइबर वाले खान-पान का नतीजा हो सकता है। डाइट में सही बदलाव, पर्याप्त पानी और कुछ आसान आदतें अपनाकर कब्ज की समस्या से आराम पाया जा सकता है।

Published On: September 13, 2026 12:17 PM
Constipation Relief Tips

Constipation Relief Tips : सुबह उठते ही अगर पेट खुलकर साफ न हो, तो पूरा दिन भारीपन, सुस्ती और चिड़चिड़ेपन में बीतता है।

कई बार लोग इसे एक सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर हफ्ते में तीन बार से कम शौच हो रहा है या मल त्यागते समय बहुत जोर लगाना पड़ रहा है, तो यह आंतों की सुस्त चाल यानी कब्ज का संकेत है।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में अपनी दिनचर्या और खान-पान में थोड़े सुधार से इस परेशानी को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है।

पेट साफ न होने के मुख्य कारण

पाचन तंत्र की गति धीमी होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं:

डाइट में फाइबर की कमी: रिफाइंड आटा (मैदा), फास्ट फूड और प्रोसेस्ड चीजें खाने से आंतों में खाना धीमा आगे बढ़ता है।

पानी कम पीना: शरीर में पानी कम होने पर आंतें मल से पानी सोख लेती हैं, जिससे मल सूखा और कड़ा हो जाता है।

फिजिकल एक्टिविटी का अभाव: घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने से आंतों की प्राकृतिक गति (Bowel Movement) सुस्त पड़ जाती है।

शौच की इच्छा को टालना: जब भी शौच का प्रेशर बने, उसे रोकना धीरे-धीरे आंतों के सिग्नल सिस्टम को कमजोर कर देता है।

दवाएं और मेडिकल कंडीशन: कुछ पेनकिलर, आयरन सप्लीमेंट या एंटासिड के अलावा थायराइड, डायबिटीज और आईबीएस (IBS) जैसी समस्याओं में भी कब्ज बनी रह सकती है।

कब्ज से राहत पाने के 6 आसान और जरूरी उपाय

1. धीरे-धीरे बढ़ाएं फाइबर की मात्रा

अपनी प्लेट में हरी सब्जियां, फल (जैसे पपीता, अमरूद, सेब), दालें, चने, ओट्स और साबुत अनाज शामिल करें।

एक वयस्क को रोज लगभग 25 से 30 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। ध्यान रखें कि फाइबर की मात्रा एकदम से न बढ़ाएं, बल्कि धीरे-धीरे आदत डालें ताकि गैस की समस्या न हो।

2. भरपूर पानी और तरल पदार्थ लें

फाइबर शरीर में तभी सही से काम करता है जब उसे पर्याप्त पानी मिले। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं।

इसके अलावा छाछ, नींबू पानी या नारियल पानी जैसे तरल भी आंतों को साफ रखने में मदद करते हैं।

3. रोज 30 मिनट वॉक या हल्का व्यायाम करें

शारीरिक रूप से एक्टिव रहने से पाचन तंत्र भी एक्टिव रहता है। सुबह या शाम को 30 से 40 मिनट तेज चाल से चलना, योग करना या हल्की स्ट्रेचिंग करना आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाता है।

4. टॉयलेट जाने का एक निश्चित समय तय करें

रोजाना सुबह एक तय समय पर टॉयलेट जाने की आदत बनाएं।

नाश्ता या गुनगुना पानी पीने के 15 से 30 मिनट बाद आंतें सबसे ज्यादा एक्टिव होती हैं, इसलिए इस समय को रूटीन का हिस्सा बनाएं और कभी भी जल्दबाजी न करें।

5. बैठने का सही पोस्चर अपनाएं

वेस्टर्न टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करते समय पैरों के नीचे 6 से 7 इंच ऊंचा छोटा स्टूल रखें।

इससे घुटने कूल्हों से थोड़े ऊपर आ जाते हैं (स्क्वैट पोजीशन), जिससे मल त्याग की प्राकृतिक नली सीधी हो जाती है और पेट आसानी से साफ होता है।

6. प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड सीमित करें

चिप्स, बिस्कुट, बेकरी प्रोडक्ट्स और ज्यादा तली-भुनी चीजों से दूरी बनाएं। इनमें फाइबर न के बराबर होता है और ये आंतों में चिपककर पाचन को बिगाड़ते हैं।

कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना?

अगर कब्ज लगातार तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे, घरेलू बदलावों से कोई असर न पड़े, या फिर इसके साथ कुछ गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो लापरवाही न करें।

यदि मल के साथ खून आ रहा हो, अचानक तेजी से वजन कम हो रहा हो, पेट में तेज और लगातार दर्द रहता हो या गैस बिल्कुल पास न हो रही हो, तो खुद से कोई चूर्ण या लैक्सेटिव लेने के बजाय तुरंत किसी पेट रोग विशेषज्ञ (Gastroenterologist) से सलाह लें।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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